नई दिल्ली। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर हैं। गुरुवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली के हैदराबाद हाउस में मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, अंतरिक्ष, आधुनिक तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। पोलैंड भारत के साथ अपने व्यापार को 2030 तक दोगुना करना चाहता है। इसके लिए करीब 100 पोलिश कंपनियों के प्रतिनिधियों का एक बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देश 2024 में बनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
2030 तक भारत के साथ व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
पोलैंड भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है। पोलैंड के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, देश का लक्ष्य 2030 तक भारत के साथ व्यापार को दोगुना करना है। दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार फिलहाल करीब 6 से 6.5 अरब डॉलर के आसपास है।
पोलैंड के पूर्व राजदूत एडम बुराकोव्स्की के मुताबिक, दोनों देश व्यापार को बढ़ाकर 10 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नई दिल्ली और बेंगलुरु में कारोबारी मंच आयोजित किए जा रहे हैं, जहां दोनों देशों की कंपनियां निवेश और साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा करेंगी।
रक्षा, अंतरिक्ष और आधुनिक तकनीक पर सहयोग
डोनाल्ड टस्क के भारत दौरे में रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग प्रमुख मुद्दे हैं। पोलैंड भारत के साथ रक्षा उपकरणों के निर्माण और रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक साझेदारी बढ़ाना चाहता है।
इसके अलावा, दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। पोलैंड की कंपनियां भारत में कारोबार और निवेश के नए अवसर तलाश रही हैं।
बैटरी रिसाइक्लिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं। पोलैंड की कंपनियों के लिए भारत एक बड़ा बाजार है, जबकि भारत को यूरोपीय देशों के साथ तकनीकी और औद्योगिक साझेदारी मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
यूक्रेन युद्ध और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा
भारत और पोलैंड के बीच बातचीत में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी शामिल हैं। पोलैंड की सरकार के मुताबिक, यूक्रेन में जारी युद्ध और पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा होनी है।
पोलैंड यूरोपीय संघ का सदस्य है और भारत के साथ आर्थिक संबंधों को विस्तार देने में उसकी दिलचस्पी बढ़ रही है। दोनों देश व्यापार और निवेश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मुद्दों पर भी संवाद करना चाहते हैं। भारत और पोलैंड के संबंधों को अगस्त 2024 में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था।
भारत ने 1,000 पोलिश बच्चों को दी थी शरण
भारत और पोलैंड के रिश्तों का इतिहास केवल व्यापार और कूटनीति तक सीमित नहीं है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत ने पोलैंड के उन बच्चों को भी शरण दी थी, जो युद्ध की वजह से बेघर हो गए थे। इस कहानी का संबंध गुजरात के जामनगर के पास स्थित बालाचड़ी से है।
1939 में जर्मनी और सोवियत संघ के हमलों के बाद पोलैंड पर कब्जा हो गया था। इसके बाद बड़ी संख्या में पोलिश नागरिकों को अपना घर छोड़ना पड़ा। इनमें हजारों बच्चे भी शामिल थे।
1942 में नवानगर रियासत के महाराजा दिग्विजयसिंहजी ने जामनगर के पास बालाचड़ी में करीब 1,000 पोलिश बच्चों को शरण दी। उनके रहने, खाने, पढ़ाई और इलाज का इंतजाम किया गया। बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने का अवसर भी मिला।
महाराजा के इस मानवीय कदम के कारण पोलैंड में उन्हें ‘डोब्री महाराजा’ यानी ‘गुड महाराजा’ के नाम से याद किया जाने लगा। भारत और पोलैंड के बीच आज भी इस ऐतिहासिक घटना को दोनों देशों की दोस्ती के महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में देखा जाता है। हाल ही में आयोजित जाम साहेब स्मृति युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत पोलिश युवाओं ने बालाचड़ी स्थित स्मारक का दौरा भी किया था।




