चित्रकूट। मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी चित्रकूट में शनिवार को आए जल प्रलय ने सब कुछ डूबों दिया है। यहां की प्रमुख मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। दोपहर 3 बजे तक नदी खतरे के निशान से करीब 8 मीटर ऊपर बह रही थी। जलस्तर बढ़ने से नदी का पानी तेजी से आसपास के निचले इलाकों में फैलने लगा है। रामघाट पर चित्रकूट को मध्य प्रदेश से जोड़ने वाले तीनों पुल पानी में डूब गए। इससे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच संपर्क टूट गया है।
प्रशासन ने रोका आवागमन
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का आवागमन रोक दिया है। जिला मुख्यालय पहुंचने से पहले बने पुल पर भी मंदाकिनी का पानी बह रहा है। ऐसे में चित्रकूट आने-जाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
पानी का लगातार बढ़ रहा दबाब
सतना जिले से लेकर पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों तक हालात बिगाड़ दिए हैं। वहीं रामघाट में बड़ा पुल बह गया है। शहर हो या गांव, नदी-नाले हों या निचले इलाके हर तरफ पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है। लेकिन धर्मनगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने ऐसा विकराल रूप धारण कर लिया है कि पूरा इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया है।
2003 में आई थी ऐसी बाढ़
मंदाकिनी में आई बाढ़ को अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ों में से एक माना जा रहा है। अधिकारियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इस बार वर्ष 2003 में आई बाढ़ का रिकॉर्ड भी टूटता दिखाई दे रहा है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पूरे जिले में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन और पुलिस की ओर से लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की जा रही है।




