DAVV Medical College: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) झाबुआ में अपना मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी में है। विश्वविद्यालय को जमीन आवंटित हो चुकी है और झाबुआ जिला अस्पताल को टीचिंग हॉस्पिटल के रूप में सौंपा जाएगा। नए भवन के निर्माण तक इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में अस्थायी रूप से मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति नेशनल मेडिकल कमीशन से मांगी गई है। 100 सीटों वाले इस मेडिकल कॉलेज के लिए 300 बेड का अस्पताल तैयार किया जाएगा। कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने बताया कि इस महीने निर्णय आने की उम्मीद है।
DAVV Medical College: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (Devi Ahilya Vishwavidyalaya – DAVV) झाबुआ में अपना पूर्णकालिक मेडिकल कॉलेज (Medical College) स्थापित करने की तैयारी में है। विश्वविद्यालय को इस परियोजना के लिए जमीन भी आवंटित हो चुकी है। फिलहाल नए भवन के निर्माण तक इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति मांगी गई है।
कुलगुरु ने दी विस्तृत जानकारी
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई (Vice Chancellor Prof. Rakesh Singhai) ने बताया कि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (Executive Council) ने झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला लिया था। मध्य प्रदेश शासन (Madhya Pradesh Government) ने हायर एजुकेशन विभाग के माध्यम से विश्वविद्यालय को आवश्यक जमीन आवंटित कर दी है।
जिला अस्पताल बनेगा टीचिंग हॉस्पिटल
झाबुआ जिला अस्पताल (Jhabua District Hospital) को मध्य प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय को सौंपने जा रही है। इसे शैक्षणिक अस्पताल (Teaching Hospital) के रूप में उपयोग किया जाएगा। कुलगुरु ने कहा कि इससे मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी क्लिनिकल ट्रेनिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
अस्थायी रूप से इंजीनियरिंग कॉलेज में संचालन
नए परिसर के निर्माण पूरा होने तक राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Rajiv Gandhi Proudyogiki Vishwavidyalaya) के इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति मांगी गई है। विश्वविद्यालय ने इस संबंध में नेशनल मेडिकल कमीशन (National Medical Commission – NMC) में आवेदन भी कर दिया है।
इस महीने आने की उम्मीद
कुलगुरु ने उम्मीद जताई कि इस महीने तक NMC से सकारात्मक निर्णय आ सकता है। उन्होंने बताया कि 100 सीटों वाले मेडिकल कॉलेज के लिए 300 बेड वाले अस्पताल की जरूरत होती है। झाबुआ जिला अस्पताल में वर्तमान में 250 बेड हैं, जिन्हें बढ़ाकर 300 बेड किया जाएगा।
शुरुआती चरण में 350 से 400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान
अस्पताल पहले से उपलब्ध होने के कारण उसकी लागत नहीं आएगी, लेकिन मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण के लिए शुरुआती चरण में 350 से 400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। विश्वविद्यालय प्रशासन (University Administration) का मानना है कि झाबुआ जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की स्थापना स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा (Medical Education) के बेहतर अवसर प्रदान करेगी।




