नईदिल्ली। चीनी की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह कैसा आत्मनिर्भर भारत है। देश में तैयार होने वाले गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए ऐथनॉल में झोक रहे है। दूसरी तरफ शक्कर की दूसरे देशों से खरीदी कर रहे है। उन्होने कहा कि आज चीनी के दाम आसमान छू रहे है, हालांकि, केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया।
70 रूपए तक पहुची शक्कर की कीमत
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का दावा है कि देश में शक्कर की कीमतें 40 प्रतिशत तक बढ़ी है। शक्कर की कीमतें लगातार बढ़ने से देश के कई शहरों में शक्कर 70 रूपए किलोग्राम तक बिक्री हो रही है। उन्होंने सवाल किया कि त्योहारों से पहले आम लोगों पर बढ़े इस खर्च की जिम्मेदारी किसकी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने एथेनॉल नीति पर सवाल उठाए है और कहा कि जब देश में चीनी की कमी है तो गन्ने और अनाज को ई-20 के लिए एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही।
सरकार ने चीनी के रॉ डयूटी आयात पर दी मंजूरी
शक्कर के दाम को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर बिना डयूटी के आयात करने के लिए अपनी मंजूरी दी है। सरकार का कहना है कि चालू सीजन में पहले 343 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का अनुमान था, लेकिन अब इसे घटाकर 306 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। गन्ने की फसल को रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों से नुकसान हुआ है. कई इलाकों में ज्यादा बारिश और जलभराव का भी उत्पादन पर असर पड़ा है. इसके साथ त्योहारों से पहले मांग बढ़ने, वैश्विक बाजार में कम सप्लाई, जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसे कारणों से भी कीमतों पर दबाव बढ़ा है। वैश्विक बाजार में भी चीनी महंगी हुई है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी पर सरकार से किए तीन सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शक्कर के बढ़ते दामो को लेकर सरकार से तीन सवाल किए है। पहला यह कि दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देश भारत में आज चीनी का भंडार पिछले 9 सालों में सबसे निचले स्तर पर क्यों है? हम निर्यात रोकने और 10 लाख टन चीनी बिना शुल्क के आयात करने की स्थिति तक कैसे पहुंच गए?
चीनी तीन महीनों में लगभग 40 प्रतिशत महंगी हो गई है- त्योहारों से ठीक पहले जनता पर पड़ रहे इस मूल्य वृद्धि के लिए कौन जिम्मेदार है?
जब देश में चीनी की कमी है और सरकार विदेशों से चीनी आयात कर रही है, तो गन्ने और अनाज को 20 यूरो में इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है? यह किस तरह का आत्मनिर्भर भारत है?




