Bina-Katni Third Railway Line Project: बीना-कटनी तीसरी रेल लाइन परियोजना को वर्ष 2016 में स्वीकृति मिली थी। वित्तीय वर्ष 2017-18 से इस तीसरी लाइन के निर्माण कार्य की शुरुआत हुई। लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की मूल समय-सीमा वर्ष 2022 निर्धारित की गई थी। कोरोना महामारी के कारण कार्य प्रभावित हुआ, जिससे देरी हुई। इसके बाद तीन वर्षों में शेष कार्य पूर्ण कर लिया गया।
Bina-Katni Third Railway Line Project: पश्चिम मध्य रेलवे के कटनी-बीना रेल खंड पर लंबे इंतजार के बाद तीसरी रेल लाइन का निर्माण कार्य अंततः पूरा हो गया है। यह 263 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन परियोजना अब पूरी तरह तैयार है। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की अंतिम रिपोर्ट और अनुमति मिलते ही दोनों छोरों के बीच ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा। संभावना है कि अगले महीने तक इस पूरे खंड पर ट्रेनें दौड़ने लगेंगी।
इस विकास से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही में काफी सुधार होगा, जिससे ट्रेनों को स्टेशनों पर लंबे समय तक रोकने की समस्या कम होगी और यात्रा समय में कमी आएगी।
अंतिम 25 किमी का कार्य हाल ही में पूरा
कटनी-बीना तीसरी लाइन का अधिकांश हिस्सा पहले से ही बन चुका था। केवल बांदकपुर-घटेरा और पथरिया-असलाना के बीच कुल 25 किलोमीटर का शेष कार्य बाकी था, जिसे गत सप्ताह सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इन दोनों खंडों पर सीआरएस टीम ने 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से ट्रायल रन किया, जो प्रारंभिक रूप से सफल रहा। इसके साथ ही कटनी से बीना तक का पूरा रेल खंड अब तीन लाइनों वाला हो गया है। इससे रेलवे की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
कोरोना काल में हुआ था विलंब
यह परियोजना वर्ष 2016 में स्वीकृत हुई थी और वित्तीय वर्ष 2017-18 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। कुल लगभग तीन हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की मूल समय-सीमा वर्ष 2022 निर्धारित थी। हालांकि, कोरोना महामारी के कारण कार्य प्रभावित हुआ और समय पर पूरा नहीं हो सका। इसके बाद पिछले तीन वर्षों में रेलवे ने तेज गति से काम किया और अब निर्माण पूर्ण हो गया है।
ट्रेनों की आवाजाही होगी तेज और सुगम
कटनी-बीना रेल खंड पर 30 से अधिक बड़े-छोटे रेलवे स्टेशन हैं। वर्तमान में यह दोहरी लाइन वाला मार्ग है, जो बीना से आगे झांसी और कटनी से आगे शहडोल होते हुए बिलासपुर तक जाता है। इस व्यस्त रूट पर यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी भारी दबाव रहता है, जिसके कारण अक्सर ट्रेनों को स्टेशन आउटर पर रोकना पड़ता है।
तीसरी लाइन के उपलब्ध होने से दो लाइनों पर ट्रेन चलने पर तीसरी लाइन से ओवरटेक या पास दिया जा सकेगा। इससे ट्रेनें तेजी से गंतव्य तक पहुंच सकेंगी और समग्र परिचालन में सुधार होगा।




