भोपाल। जश्ने आजादी की धूंम शुरू हो गई। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। यहां मुख्यमंत्री घ्वजारोहड़ करके परेड की सलामी लेगें। मध्यप्रदेश का यह जश्ने आजादी का न सिर्फ गवाह है बल्कि 185 साल पुराने इस मैदान में रियासत की शान, आजादी की गूंज और लोकतंत्र की धड़कनें दर्ज हैं. यह मैदान कभी भोपाल रियासत की पलटनों की परेड का गवाह बना, तो कभी आजाद भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं का. यही वजह है कि इसे भोपाल का जीवंत इतिहास कहा जाता है।
ऐसे बन गया लाल परेड ग्राउंड
भोपाल का लाल परेड ग्राउंड करीब 185 साल पुराना ऐतिहासिक मैदान है। इसका निर्माण 1837 से 1844 के बीच नवाब जहांगीर मोहम्मद खान के कार्यकाल में रियासतकालीन सैनिकों और पलटनों की परेड व सैन्य अभ्यास के लिए कराया गया था। यहाँ परेड करने वाले सैनिकों की लाल पोशाक और लाल मिट्टी के कारण इसे लाल परेड ग्राउंड कहा जाने लगा।
सैन्य अभ्यास के लिए हुआ ता ग्राउंड का निर्माण
भोपाल का लाल परेड ग्राउंड करीब 185 साल पुराना ऐतिहासिक मैदान है। इसका निर्माण 1837 से 1844 के बीच किया गया था। बताते है कि इसका निर्माण नवाब जहांगीर मोहम्मद खान के कार्यकाल में रियासतकालीन सैनिकों और पलटनों की परेड व सैन्य अभ्यास के लिए कराया गया था। यहां रोजाना परेड का आयोजन होता था, इसी के चलते इसका नाम परेड ग्राउंड पड़ा. उस समय सैनिकों को लाल रंग की ड्रेस पहनाई जाती थी. चूंकि लाल परेड ग्राउंड पर सुर्ख रंग की मिट्टी पाई जाती है, इसलिए इसका नाम लाल परेड ग्राउंड पड़ा। खास बात है कि ब्रिटिश शासन के दौरान अधिकारियों के स्वागत के लिए यहां लाल कोठी को बनाया गया था. यह शहर की पहली इमारत थी, जिसे लाल ईंटों से बनाया गया था. इसी के चलते इसका नाम लाल कोठी पड़ा. आज इसे भवन राजभवन के नाम से जाना जाता है. यह भी भोपाल की सबसे खूबसूरत और भव्य इमारतों में शामिल है.
राज्यपाल ने ली थी परेड की सलामी
जानकारी के तहत भारत की आजादी के बाद यही मैदान लोकतंत्र के पहले कदमों का गवाह बना, जहां 1 नवंबर 1956 को प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने जनता को संबोधित किया था. वहीं पहले राज्यपाल डॉ. पट्टाभि सीतारामैया ने परेड की सलामी ली थी। तब से यह मैदान देश भर में मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पर्व के आयोजनों में मध्यप्रदेश के राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
शहर की लक्ष्मण रेखा
भोपाल का लाल परेड ग्राउंड पुराने और नए शहर के बीच की लक्ष्मण रेखा माना जाता है। रियासत काल से लेकर आधुनिक मध्य प्रदेश के राजनीतिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय उत्सवों का मुख्य केंद्र रहा है। यह स्थान पुराने भोपाल (जहांगीराबाद क्षेत्र) और आधुनिक नए शहर (अरेरा हिल्स के समीप) की सीमा पर स्थित है, इसलिए इसे दोनों के बीच की लक्ष्मण रेखा कहा जाता है। यहां हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मुख्य राजकीय समारोह, पुलिस परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और राष्ट्रीय वन मेला जैसे बड़े आयोजन होते हैं।




