Bhopal 70 Year Old Slum Demolition: भोपाल के मानस भवन क्षेत्र में 70 साल पुरानी बस्ती हटाने की कार्रवाई जारी है, जिसमें 27 परिवारों को अन्य क्षेत्रों में शिफ्ट कर पुनर्वास (Rehabilitation) किया जा रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान स्थानीय लोगों का जोरदार विरोध, अव्यवस्था और पुनर्वास स्थलों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रशासन पर गरीबों के साथ अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया।
Bhopal 70 Year Old Slum Demolition: भोपाल के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन के पास बसी करीब 70 साल पुरानी झुग्गी बस्ती (Slum Settlement) को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई गुरुवार को तेज हो गई। पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोक दी गई और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। इस दौरान 27 परिवारों को हटाकर नए स्थानों पर शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है।
विरोध और तनावपूर्ण माहौल
कार्रवाई के दौरान स्थानीय रहवासियों और कांग्रेस नेताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कई लोग धरने पर बैठ गए, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। पुलिस ने हंगामा करने वालों को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आदिवासियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार (Dignified Treatment) नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारों को शहर से दूर भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी जैसे इलाकों में शिफ्ट किया जा रहा है।
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कई नेता मौके पर
विरोध प्रदर्शन के दौरान एक युवक टावर पर चढ़ गया, जिसे पुलिस की समझाइश के बाद नीचे उतारा गया। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा सहित अन्य कांग्रेस नेताओं ने इसे गरीबों के साथ अन्याय बताते हुए उचित पुनर्वास (Proper Rehabilitation) की मांग की।
रहवासियों की परेशानी और दर्द
कार्रवाई के बीच कई परिवारों ने अपने घरों में ताला लगाकर सामान पुलिस को सौंप दिया। लोगों ने शिकायत की कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जिससे जरूरी दस्तावेज और सामान घरों में ही रह गए। एक छात्रा ने रोते हुए बताया कि उसके नीट परीक्षा (NEET Exam) के महत्वपूर्ण दस्तावेज घर में दब गए हैं और कल ही उसकी परीक्षा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्षों की मेहनत से बनाए गए घर और रोजगार (Livelihood) अचानक छिन जाने से उनका पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा। बच्चों की पढ़ाई, रोजमर्रा की जरूरतें और स्वास्थ्य सुविधाएं (Health Facilities) भी प्रभावित होंगी।
पुनर्वास पर सवाल, दूरदराज इलाकों में शिफ्टिंग पर चिंता
उमंग सिंघार ने प्रशासन से सवाल किया कि केवल बस्ती हटाना (Slum Eviction) ही समाधान नहीं है। नए स्थानों पर रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकार की है।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास (Alternative Housing) उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, इस घटना ने भोपाल में पुनर्वास नीति (Rehabilitation Policy) और मानवीय पहलुओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।




