Bengaluru CET Controversy: जनेऊ उतरवाने का आरोप, 3 प्रोफेसर सस्पेंड

कर्नाटक की राजधानी Bengaluru में CET (Common Entrance Test) के दौरान बड़ा विवाद सामने आया है, जहां कथित तौर पर छात्रों को जनेऊ पहनकर परीक्षा देने से रोका गया। घटना के बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है, जबकि कॉलेज प्रशासन ने तीन प्रोफेसरों को सस्पेंड कर दिया है।

क्या है पूरा मामला

यह घटना 24 अप्रैल को CET परीक्षा (CET Exam) के पहले दिन की बताई जा रही है। छात्रों के मुताबिक, परीक्षा केंद्र में एंट्री से पहले उन्हें जनेऊ उतारने के लिए कहा गया। एक छात्र ने बताया कि जब उसने जनेऊ पहनकर एग्जाम हॉल में प्रवेश करने की कोशिश की, तो उसे रोक दिया गया और कहा गया कि बिना इसे हटाए अंदर नहीं जा सकते। मजबूरी में उसे जनेऊ उतारना पड़ा ताकि वह परीक्षा दे सके।

छात्रों और परिजनों का विरोध

इस घटना के बाद छात्रों और उनके परिजनों में नाराजगी देखने को मिली। एक छात्र की मां ने कहा कि जनेऊ उनके धार्मिक विश्वास (Religious Belief) का हिस्सा है और इसे हटाने के लिए मजबूर करना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह शरीर का हिस्सा माना जाता है, तो इसे परीक्षा नियमों में क्यों शामिल किया गया।

सरकार और प्रशासन का एक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री M. C. Sudhakar ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कॉलेज प्रशासन ने भी तुरंत कदम उठाते हुए तीन प्रोफेसरों को सस्पेंड कर दिया है।

पुलिस केस दर्ज

Bengaluru Police ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS – Bharatiya Nyaya Sanhita) के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस अब जांच कर रही है कि क्या यह नियमों का गलत पालन था या जानबूझकर किया गया कृत्य।

राजनीतिक बयानबाजी


इस घटना को लेकर Bharatiya Janata Party ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष के नेताओं का आरोप है कि यह हिंदू धार्मिक प्रतीकों (Hindu Religious Symbols) को निशाना बनाने की कोशिश है। वहीं, सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि यह एक प्रशासनिक चूक हो सकती है, जिसकी जांच की जा रही है।

क्या कहते हैं नियम

आमतौर पर परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा कारणों से धातु या इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर रोक होती है, लेकिन धार्मिक प्रतीकों को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन न होने के कारण ऐसे विवाद सामने आते हैं।

फिलहाल, यह मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में साफ होगा कि यह नियमों की गलत व्याख्या थी या फिर कोई जानबूझकर की गई कार्रवाई।

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