देश में E20 Petrol को लेकर बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party – AAP) ने शुक्रवार, 1 अगस्त को E20 Fuel के मुद्दे पर नेशनल टाउन हॉल आयोजित किया। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने केंद्र सरकार की Ethanol Blended Petrol Policy पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों को पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल (Pure Petrol) खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए।
केजरीवाल ने कहा कि यदि कोई उपभोक्ता E20 Petrol खरीदना चाहता है तो उसे यह विकल्प मिले, लेकिन जो लोग सामान्य पेट्रोल इस्तेमाल करना चाहते हैं, उन्हें भी Pure Petrol उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोगों पर E20 ईंधन थोप रही है।
AAP ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
टाउन हॉल के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा कि चर्चा के दौरान लोगों की ओर से तीन प्रमुख मांगें सामने आईं—
- पेट्रोल पंपों पर E20 Petrol और Pure Petrol दोनों का विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
- E20 Fuel की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम रखी जाए।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने के बाद भारत में पेट्रोल की खुदरा कीमत 84 रुपये प्रति लीटर से कम होनी चाहिए।
इथेनॉल पेट्रोल से महंगा और कम माइलेज देता है”
केजरीवाल ने दावा किया कि Ethanol Fuel कई मामलों में उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। उनके मुताबिक E20 पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज कम होता है, मेंटेनेंस खर्च बढ़ता है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इथेनॉल उत्पादन करने वाले प्लांट्स के आसपास भूजल प्रदूषण की समस्या पैदा होती है। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि यदि इथेनॉल से न किसानों को बड़ा फायदा हो रहा है, न विदेशी मुद्रा की पर्याप्त बचत हो रही है और न ही उपभोक्ताओं को लाभ मिल रहा है, तो सरकार इसे इतनी आक्रामक तरीके से क्यों बढ़ावा दे रही है।
सरकार पर लगाया दबाव में काम करने का आरोप
अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इथेनॉल नीति को लेकर भ्रामक आंकड़े पेश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस नीति के पीछे अमेरिका का दबाव हो सकता है, हालांकि इस आरोप के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक साक्ष्य पेश नहीं किया।
भारत में E20 Petrol का विरोध क्यों हो रहा है?
भारत में E20 Petrol यानी 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल के मिश्रण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों से खरीदे जाने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है।
हालांकि, विशेष रूप से 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के कुछ मालिकों का कहना है कि E20 ईंधन से उनकी गाड़ियों का माइलेज घट रहा है, इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और रखरखाव का खर्च बढ़ गया है। दूसरी ओर, सरकार और कई वाहन निर्माता कंपनियां कहती हैं कि E20-Compatible Vehicles के लिए यह ईंधन सुरक्षित है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।




