रीवा राजघराने के मंदिर में उमड़ी आस्था: 10 किमी की दुर्गम पदयात्रा कर हजारों श्रद्धालुओं ने किए बांधवाधीश के दर्शन

A surge of devotion at the Bandhavadhish Temple of the Rewa royal family.

उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बीच स्थित ऐतिहासिक और दुर्गम बांधवगढ़ किले पर जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आस्था का अद्भुत जनसैलाब उमड़ पड़ा। साल में केवल एक बार खुलने वाले भगवान बांधवाधीश मंदिर के कपाट खुलते ही हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। जानकारी के अनुसार, रीवा राजघराने द्वारा बनवाए गए इस प्राचीन मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर सबसे पहले प्रथम पूजा दिव्यराज सिंह द्वारा संपन्न की गई।

रिजर्व एरिया के कड़े सुरक्षा प्रबंधों और वन्यजीवों के बीच घने जंगलों तथा ऊंचे पहाड़ों के कठिन रास्तों को पार करते हुए 6 हजार से अधिक भक्तों ने करीब 10 किलोमीटर लंबी कठिन पदयात्रा तय कर किले तक का सफर पूरा किया। सुबह से शुरू हुए इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरा अभयारण्य क्षेत्र ‘जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे भक्तों ने बिना किसी असुविधा के भगवान बांधवाधीश के दर्शन लाभ प्राप्त किए।

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