नईदिल्ली। पेट्रोल की समस्या से निपटने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। जिसके तहत बिजली से चलित वाहनों को सड़क पर उतारा गया और ईवी वाहनों का इस्तेमाल लोग तेजी से कर रहे है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को लेकर बड़ा ऐलान कर दिए है। उन्होने बताया है कि सब कुछ ठीक रहा तो अक्टूबर में 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाली कार लांच हो सकती है। खास बात यह है कि इथेनॉल से चलने वाली यह कार चलते समय बिजली भी पैदा करेगी।
19 देशों में इथेनॉल का इस्तेमाल
केन्दीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने दिल्ली के एक कार्यक्रम में बताया कि अब दुनिया 19 देशों में इथेनॉल का इस्तेमाल हो रहा है. भारत में भी पेट्रोल में इथेनॉल की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाई जा रही है। गडकरी के मुताबिक इथेनॉल के इस्तेमाल से पेट्रोल के मुकाबले ईंधन की लागत कम करने में मदद मिल सकती है। इससे प्रदूषण नियंत्रण का भी दावा किया गया है।
ई-20 पेट्रोल से वाहनों में शिकायतें नही
कार्यक्रम के दौरान केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा कि ई-20 पेट्रोल के कारण वाहनों में बड़े स्तर पर समस्या की शिकायत नहीं मिली है। सरकार भी पहले कह चुकी है कि ई-20 के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन बंद पड़ने का कोई सत्यापित प्रमाण नहीं मिला है।
इस तरह के लाभ
नितिन गड़कारी ने बताया कि पेट्रोल की अत्यधिक महंगी कीमतों की तुलना में, इथेनॉल का उपयोग ग्राहकों को मात्र 25 रुपये प्रति लीटर के बराबर पड़ेगा और इससे हवा में जीरो प्रदूषण फैलेगा। उन्होने कहा कि इससे देश के किसानों को सीधे लाभ हो रहा है। उन्होने कहा कि मक्का और गन्ने से इथेनॉल बनाने के सरकार के फैसले से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को सीधे 45,000 करोड़ की भारी आय प्राप्त हुई है।
मुख्य विशेषताएँ और फायदे
- कम लागत: नितिन गडकरी के मुताबिक, 100% इथेनॉल पर कार चलाने का खर्च पेट्रोल के मुकाबले काफी कम यानी लगभग 25 रुपये प्रति लीटर के बराबर पड़ेगा।
- बिजली उत्पादन: यह फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पूरी तरह इथेनॉल से चलने के साथ-साथ चलते समय 60 प्रतिशत तक बिजली (इलेक्ट्रिसिटी) भी पैदा करेगा।
- प्रदूषण में कमी: इस तकनीक से प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित करने और शून्य प्रदूषण के लक्ष्य की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी।
- किसानों को लाभ: इथेनॉल का उत्पादन गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से होता है, जिससे देश के किसानों की आय बढ़ेगी और वे समृद्ध होंगे।
- आयात पर निर्भरता कम: विदेशी कच्चे तेल (जीवाश्म ईंधन) के महंगे आयात पर भारत की निर्भरता घटेगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा मिलेगा।




