श्रीलंका के खिलाफ Zak Crawley के चयन ने खड़े किए इंग्लिश क्रिकेट पर सवाल

Zak Crawley walking back to pavilion after dismissal during a match against Sri Lanka.

श्रीलंका के खिलाफ पहले वनडे में इंग्लैंड की हार ने टीम की विदेशी पिचों पर खराब फॉर्म को एक बार फिर उजागर कर दिया है। लेकिन इस हार से ज्यादा चर्चा सलामी बल्लेबाज जैक क्रॉली (Zak Crawley) के चयन को लेकर हो रही है। दो साल से अधिक समय तक इस फॉर्मेट से दूर रहने के बाद सीधे टीम में वापसी ने इंग्लिश क्रिकेट के घरेलू ढांचे और चयनकर्ताओं की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

चयन प्रक्रिया में ‘गट फील’ की भूमिका

इंग्लैंड की चयन समिति ने श्रीलंका दौरे के लिए जब जैक क्रॉली के नाम का ऐलान किया, तो कई जानकार हैरान थे। क्रॉली ने दिसंबर 2023 के बाद से कोई वनडे मैच नहीं खेला था। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें बिना किसी घरेलू 50-ओवर क्रिकेट (List A) के अनुभव के सीधे नेशनल टीम में जगह दी गई।

यह फैसला दर्शाता है कि इंग्लैंड के चयनकर्ता अब आंकड़ों से ज्यादा अपनी ‘अंतरात्मा की आवाज’ या ‘गट फील’ पर भरोसा कर रहे हैं। श्रीलंका के खिलाफ पहले मैच में क्रॉली का महज 6 रन पर आउट होना इस फैसले की कमजोरी को दर्शाता है। आसिथा फर्नांडो ने उन्हें जिस तरह आउटस्विंगर पर फंसाया, वह उनकी पुरानी तकनीकी खामियों की याद दिलाता है।

घरेलू क्रिकेट कैलेंडर का बिगड़ता संतुलन

क्रॉली के मामले ने इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट की एक बड़ी समस्या को सामने ला दिया है। जब देश में वन-डे कप का आयोजन होता है, तो प्रमुख खिलाड़ी ‘द हंड्रेड’ (The Hundred) खेलने में व्यस्त होते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के पास 50-ओवर फॉर्मेट में अपनी फॉर्म साबित करने का मौका ही नहीं बचता।

इंग्लैंड के सफेद गेंद कप्तान हैरी ब्रूक ने स्वीकार किया कि रन ही एकमात्र पैमाना हैं, लेकिन सवाल यह है कि खिलाड़ी रन बनाएंगे कहां? यदि खिलाड़ी को घरेलू स्तर पर वनडे खेलने का मौका ही नहीं मिलेगा, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तैयारी अधूरी रहना लाजमी है।

टेस्ट और वनडे के बीच धुंधली होती लकीरें

ब्रेंडन मैकुलम और बेन स्टोक्स के ‘बैज़बॉल’ (Bazball) युग में इंग्लैंड ने टेस्ट और सीमित ओवरों के क्रिकेट के बीच के अंतर को कम करने की कोशिश की है। जैक क्रॉली और बेन डकेट की सलामी जोड़ी को इसी सोच के तहत वनडे में उतारा गया।

हैरी ब्रूक का तर्क है कि वनडे क्रिकेट की शुरुआत टेस्ट जैसी ही होती है और क्रॉली के पास वह क्षमता है कि वह पहली गेंद से विपक्षी टीम पर दबाव बना सकें। हालांकि, आंकड़े इस दावे का समर्थन नहीं करते। एशेज सीरीज के दौरान भी इस जोड़ी का औसत निराशाजनक रहा था और अब श्रीलंका की टर्निंग पिचों पर भी वे संघर्ष करते दिख रहे हैं।

क्या ‘कंसिस्टेंसी’ अब प्राथमिकता नहीं रही?

2015 से 2019 के बीच जब इंग्लैंड की वनडे टीम दुनिया की सबसे खतरनाक टीम मानी जाती थी, तब उनके पास जेसन रॉय, एलेक्स हेल्स और जॉनी बेयरस्टो जैसे सलामी बल्लेबाज थे। इन सभी का औसत 40 से ऊपर था और स्ट्राइक रेट 100 के करीब।

इसके उलट, जैक क्रॉली की बल्लेबाजी में निरंतरता की भारी कमी दिखती है। खुद कोच मैकुलम उन्हें एक ‘अस्थिर’ लेकिन प्रभावशाली खिलाड़ी मान चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक विश्व स्तरीय टीम को ऐसे ओपनर की जरूरत है जो कभी-कभी अच्छी पारियां खेले या ऐसे की जो टीम को ठोस और भरोसेमंद शुरुआत दिला सके?

डकेट की पारी ने दिखाया रास्ता

जहां एक ओर क्रॉली फेल रहे, वहीं बेन डकेट ने 62 रनों की संघर्षपूर्ण पारी खेलकर यह दिखाया कि इस फॉर्मेट में धैर्य की कितनी जरूरत है। डकेट का फायदा यह है कि उन्होंने ‘द हंड्रेड’ के दौर से पहले पर्याप्त घरेलू वनडे क्रिकेट खेला है, जिससे उन्हें खेल की गति को समझने में मदद मिलती है।

श्रीलंका के स्पिन आक्रमण के सामने इंग्लिश बल्लेबाजों की विफलता ने यह साफ कर दिया है कि केवल आक्रामकता से काम नहीं चलेगा। तकनीकी रूप से सक्षम और परिस्थितियों के अनुसार ढलने वाले खिलाड़ियों की कमी इंग्लैंड को खल रही है।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

श्रीलंका के खिलाफ जैक क्रॉली का चयन केवल एक खिलाड़ी की वापसी का मामला नहीं है, बल्कि यह इंग्लिश क्रिकेट की चयन नीतियों में गहरी दरारों का संकेत है। यदि घरेलू स्तर पर 50-ओवर क्रिकेट को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो इंग्लैंड के लिए वनडे प्रारूप में अपनी पुरानी बादशाहत वापस पाना मुश्किल होगा।

उपलब्ध विवरणों और वर्तमान टीम प्रदर्शन के आधार पर, इंग्लैंड को अपनी रोटेशन पॉलिसी और डोमेस्टिक शेड्यूलिंग पर दोबारा विचार करने की सख्त जरूरत है।

अधिक जानने के लिए आज ही शब्द साँची के सोशल मीडिया पेज को फॉलो करें और अपडेटेड रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *