Privilege Motion Against Rahul Gandhi: खतरे में राहुल गांधी! बीजेपी अब नहीं छोड़ेगी?

What Is Privilege Motion In Parliament/प्रिवलेज मोशन क्या है/ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव क्या है: संसद में बजट सत्र में विपक्ष ने बजट को छोड़कर दुनिया भर की बातें की और खूब ड्रामा किया। चाहे पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की अप्रकाशित किताब पर बेमतलब की बातें हों या पीएम मोदी की कुर्सी के पास जाकर नारेबाजी करना हो लेकिन बुधवार को लीडर ऑफ़ ऑपोजिशन राहुल गांधी (LOP Rahul Gandhi) ने संसद की मर्यादा को तार-तार कर दिया। राहुल गांधी ने न सिर्फ असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल किया बल्कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर देश को बेच देने जैसे आरोप लगाए। अब भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई करने की ठान ली है. सांसद और मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए Rahul Gandhi के खिलाफ Privilege Motion यानी विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश करने की बात कही है. Privilege Motion यानी विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव क्या है आइये जानते हैं

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव क्या होता है?

What Is Privilege Motion: भारतीय संसद में प्रिविलेज मोशन (या विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव) एक औपचारिक शिकायत या प्रस्ताव होता है, जो तब पेश किया जाता है जब किसी सांसद को लगता है कि संसद के किसी सदस्य, मंत्री, या किसी अन्य व्यक्ति ने संसदीय विशेषाधिकारों (Parliamentary Privileges) का उल्लंघन किया है। ये विशेषाधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 (लोकसभा/राज्यसभा के लिए) और अनुच्छेद 194 (राज्य विधानसभाओं के लिए) में दिए गए हैं। मुख्य विशेषाधिकारों में शामिल हैं:

  • सदन में खुलकर बोलने की आजादी (बिना अदालत में जवाबदेही के)।
  • सदन की कार्यवाही प्रकाशित करने का अधिकार।
  • सदन की गरिमा, अधिकारों और शक्तियों की रक्षा।

अगर कोई सदस्य झूठे तथ्य पेश करके, गलत जानकारी देकर, या सदन को गुमराह करके इन विशेषाधिकारों का उल्लंघन करता है, तो कोई अन्य सांसद प्रिविलेज मोशन ला सकता है।

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव की प्रक्रिया/ Process Of Privilege Motion:

  1. कोई सांसद लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा चेयरमैन को नोटिस देता है।
  2. स्पीकर/चेयरमैन इसे स्वीकार करते हैं या नहीं, यह तय करते हैं।
  3. अगर स्वीकार होता है, तो यह प्रिविलेज कमिटी (Committee of Privileges) को भेजा जाता है।
  4. कमिटी जांच करती है, रिपोर्ट देती है।
  5. फिर पूरे सदन में चर्चा होती है, और सजा तय की जा सकती है (जैसे माफी मांगना, निलंबन, या अन्य)।

यह मोशन अक्सर राजनीतिक रूप से इस्तेमाल होता है, जैसे किसी मंत्री या विपक्षी नेता पर झूठ बोलने, सदन को गुमराह करने, या सदन की गरिमा कम करने के आरोप में।

राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव क्यों लाया जा रहा?

Why Privilege Motion Against Rahul Gandhi:

  • राहुल गांधी ने लोकसभा में भारत-अमेरिका ट्रेड डील और बजट 2026-27 पर बोलते हुए सरकार और पीएम मोदी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “देश बेच दिया गया है”, “Bharat Mata को बेच दिया”, और कुछ अन्य दावे किए (जैसे एपस्टीन केस का जिक्र आदि)
  • केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ये बयान सदन को गुमराह करने वाले, बेबुनियाद और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले हैं। इसलिए सरकार प्रिविलेज नोटिस/मोशन लाएगी।
  • रिजिजू ने राहुल गांधी को शाम 5 बजे तक माफी मांगने या बयानों को प्रमाणित (authenticate) करने को कहा, वरना मोशन दाखिल होगा।
  • यह प्रिविलेज मोशन अभी सिर्फ नोटिस या घोषणा के स्तर पर है। मोशन दाखिल होने के बाद भी प्रक्रिया लंबी चलती है।

क्या प्रिविलेज मोशन से राहुल गाँधी की सदस्यता रद्द हो सकती है?

प्रिविलेज मोशन में सजा ज्यादातर चेतानवी देना, माफ़ी मांगना, कुछ दिनों के लिए ससपेंड करना जितनी सीमित होती हैं. इसमें किसी सांसद की सदस्यता रद्द नहीं होती। राहुल गाँधी को माफ़ी मांगना पड़ सकता है या फिर सस्पेंशन झेलना पड़ सकता है.

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