Aatm Mathan :कभी -कभी हम काफी मायूस हो जाते है जब लगता है कि हमारे साथ ज़िंदगी में सब ग़लत ही ग़लत हो रहा है पर आपको नहीं लगता ग़लती से ही सही ग़लत रास्ते पर चले जाना, ग़लत लोग मिल जाना या कुछ बुरे हालात में हमारा फँस जाना कभी हमारे लिए सही भी होता है क्योंकि ये ग़लत अनुभव ही हमें सही- ग़लत की पहचान कराते हैं कैसे तो आइए जानते हैं।
आश्चर्यजनक उपलब्धि की भी वजह बन जाते हैं :-
आपको पता है जो हमें बुरे लगते हैं उन्हीं ग़लत तजुर्बों की बिना पर ही हम अपने आगे के फैसले सही ले पाते हैं ,हमारे अंदर बुरे हालात से लड़ने का माद्दा पैदा होता है। ये वो सबक़ है जो ज़िंदगी के अलावा कोई सिखा भी नहीं सकता इसलिए ग़म क्या करना बस इन हालातों से कुछ सीखने की और इनसे उबरने की कोशिश करना ही ज़िंदगी जीने का सही तरीक़ा है। कभी -कभी ऐसा भी होता है ,जो हम इन बुरे हालात में अपने लिए करना सीख जाते हैं वो हम कभी उन हालातों में नहीं सीख पाते जिन्हें हम अनुकूल ,अच्छे या ख़ुशहाल हालात कहते हैं इसलिए किसी का साथ छोड़ देना या हमें धोखा दे देना भी अच्छा है इससे हमें ये तो समझ आता है कि हम किस लायक़ हैं या हम क्या कर सकते हैं और क्या नहीं यहाँ तक कि ये भी कि हमें धोखा देने वाला इन्सान हमारा अपना नहीं था ,हमने उसको पहचानने में ग़लती की है।
संतोष करना और सम्मान देना आता है :-
बुरे हालात हमें अच्छे की क़द्र करना सिखाते हैं ,जब हम रो चुके होते हैं तो हँसी -ख़ुशी को दिल से महसूस कर पाते हैं उसकी इम्पोर्टेंस हमें समझ आती है इसी तरह जब बुरे लोगों के बीच फँसते हैं तो अच्छे लोगों की न केवल परख कर पाते हैं बल्कि उनका सम्मान भी कर पाते हैं और उनके बिछड़ जाने से डरते भी हैं इसलिए ज़िंदगी जैसी भी हो हर हाल में ऊपर वाले का शुक्र अदा करना चाहिए और यही सोचना चाहिए कि उसने जो किया वही हमारे लिए सही है, उससे बेहतर कुछ हो नहीं सकता बुरा भी कुछ मिला है तो वो भी हमें अच्छा बनाने के लिए ही है क्योंकि उसका फैसला कभी ग़लत नहीं होता। सोचियेगा ज़रूर इस बारे में फिर मिलेंगें आत्ममंथन की अगली कड़ी में धन्यवाद।
