Wayanad Tunnel Project: पर्यावरण सुरक्षा की अनदेखी और राजनीतिक ‘टैग’ की जंग; कल्लाडी हादसे पर CM Satheesan का कड़ा रुख

Wayanad tunnel project

Wayanad Tunnel Project: केरल के वायनाड में कल्लाडी टनल निर्माण स्थल पर आए भीषण भूस्खलन (Landslide) ने एक बार फिर पश्चिमी घाट की पारिस्थितिक संवेदनशीलता (Ecological Sensitivity) और अनियोजित विकास पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दुखद हादसे में तीन प्रवासी मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि पांच अन्य अभी भी लापता हैं। इस बीच, Keralam CM Satheesan ने बुधवार को पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उन्होंने विपक्ष में रहते हुए बिना व्यापक पर्यावरण अध्ययन के Wayanad tunnel project का विरोध किया था, तब उन्हें ‘विकास विरोधी’ करार दिया गया था।

तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन (VD Satheesan) ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले कड़े पर्यावरण मानदंडों का पालन करना अनिवार्य है, जिसकी अनदेखी का नतीजा आज राज्य भुगत रहा है।

कल्लाडी टनल साइट पर त्रासदी: क्या यह एक प्राकृतिक आपदा है या ‘मैन-मेड’ चूक?

मंगलवार सुबह करीब 11:15 बजे मेप्पाडी ग्राम पंचायत के कल्लाडी में अनाक्कमपॉयल-मेप्पाडी ट्विन टनल प्रोजेक्ट (Anakkompoyil-Meppadi Twin Tunnel Project) के मुहाने पर अचानक टनों वजनी मिट्टी और मलबा ढह गया। इस मलबे ने देखते ही देखते पूरे वर्कसाइट को 7 से 10 फीट गहरे कीचड़ के नीचे दफन कर दिया।

स्थानीय प्रशासन और राज्य के मंत्रियों के अनुसार, यह पूरी तरह से एक “मैन-मेड डिजास्टर” यानी मानव निर्मित आपदा है। टनल की खुदाई से निकली भारी मात्रा में मिट्टी (Excavated Soil) को वैज्ञानिक तरीके से हटाने के बजाय साइट के ठीक ऊपर असुरक्षित रूप से डंप किया गया था, जो भारी बारिश के कारण ढह गई।

“मुझे ‘विकास विरोधी’ कहा गया था”—सीएम सतीशन का एलडीएफ पर पलटवार

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान Keralam CM Satheesan काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने अतीत के राजनीतिक विवादों को याद करते हुए कहा:

“मैं वह व्यक्ति हूं जिसने इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा आलोचना झेली है। मैंने लगातार कहा था कि एक गंभीर पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के बिना Wayanad tunnel project को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। वायनाड, पश्चिमी घाट का हिस्सा होने के कारण बेहद संवेदनशील और नाजुक क्षेत्र है। उस समय सीपीआई(एम) और उनके साइबर हैंडल्स ने मुझ पर परियोजना को पटरी से उतारने का आरोप लगाया और मुझे विकास विरोधी ब्रांड कर दिया। मैंने केवल इतना कहा था कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी परियोजना को अत्यधिक सावधानी के साथ निष्पादित किया जाना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि शुरुआत में एक राज्य-स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने भी इस प्रोजेक्ट को न लेने की सिफारिश की थी और केंद्र सरकार ने भी मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव के कारण केंद्र ने करीब 50 सख्त शर्तों के साथ इसे हरी झंडी दी थी।

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केरल कैबिनेट का बड़ा फैसला: दोहरी जांच (Twin Investigations) के आदेश

बुधवार सुबह हुई केरल कैबिनेट की आपातकालीन बैठक में इस हादसे की गहन समीक्षा की गई। Keralam CM Satheesan ने घोषणा की कि सरकार ने इस मामले में दो अलग-अलग जांच कराने के आदेश जारी किए हैं:

1.निर्माण कार्य पर पूर्ण निलंबन: तत्काल प्रभाव से लागू.

जब तक दोनों जांच रिपोर्ट सौंप नहीं दी जातीं और उन्हें मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक टनल रोड प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पूरी तरह से निलंबित रहेगा।

2.तकनीकी जांच (Technical Probe): हादसे के कारणों का पता लगाना.

पहली जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि भूस्खलन का मुख्य कारण क्या था। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, निर्माण स्थल के ठीक ऊपर एक और प्राकृतिक भूस्खलन हुआ था, जिसकी कड़ियों को जोड़ा जाएगा।

3.कानूनी व अनुपालन जांच (Compliance Probe): ठेकेदारों और एजेंसियों की भूमिका.

दूसरी जांच यह पता लगाएगी कि क्या कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KRCL) और निर्माण ठेकेदार (दिलीप बिल्डकॉन) ने केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरण मंजूरी देते समय लगाई गई शर्तों का सख्ती से पालन किया था या नहीं।

केंद्र सरकार की शर्तें और पर्यावरण नियमों की कथित अनदेखी

कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वायनाड जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के अध्यक्ष और जिला कलेक्टर ने पिछले महीने ही ठेकेदारों को साइट से मिट्टी के विशाल स्टॉकपाइल (ढेर) को हटाने का लिखित आदेश दिया था। पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री ने भी साइट का दौरा कर संभावित खतरे की चेतावनी दी थी, लेकिन इन चेतावनियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

प्रमुख बिंदुविवरण
परियोजना का नामअनाक्कमपॉयल-कल्लाडी-मेप्पाडी ट्विन टनल रोड
मुख्य कार्यकारी एजेंसीकोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KRCL)
अनुपालन का मुद्दाखुदाई से निकली मिट्टी का अनियोजित और असुरक्षित भंडारण
सरकारी सहायतामृतकों के परिवारों को ₹5 लाख की अनुग्रह राशि (Ex-gratia) की घोषणा

कल्लाडी में रेस्क्यू ऑपरेशन और वर्तमान स्थिति

हादसे के दूसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), फायर एंड Rescue सर्विसेज, और केरल पुलिस के जवान लापता 5 श्रमिकों की तलाश में जुटे हैं।

राहत की बात यह है कि आपदा स्थल तक जाने वाली सड़क संपर्क को बहाल कर दिया गया है, जिससे भारी अर्थ-मूविंग मशीनरी और पोक्लेन मशीनों को मलबे हटाने के काम में लगाया जा सका है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा वायनाड में जारी ‘येलो अलर्ट’ और रुक-रुक कर हो रही भारी बारिश के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है।

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निष्कर्ष: विकास और पर्यावरण संतुलन की अनिवार्यता

वायनाड का कल्लाडी टनल हादसा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब हम विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति के संकेतों और विशेषज्ञ समितियों की चेतावनियों की अनदेखी करते हैं, तो उसकी कीमत मासूम जिंदगियों को चुकानी पड़ती है। Keralam CM Satheesan द्वारा उठाए गए सवाल केवल राजनीतिक नहीं हैं, बल्कि वे पश्चिमी घाट जैसे नाजुक इकोसिस्टम को बचाने की एक जायज चिंता को दर्शाते हैं। अब समय आ गया है कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) और पर्यावरण सुरक्षा के बीच एक मजबूत संतुलन स्थापित किया जाए।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1: वायनाड टनल प्रोजेक्ट (Wayanad tunnel project) क्या है?

Ans: यह केरल के मलप्पुरम और वायनाड जिलों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के लिए प्रस्तावित एक महत्वाकांक्षी ट्विन टनल (जुड़वां सुरंग) रोड परियोजना है, जिसे अनाक्कमपॉयल-कल्लाडी-मेप्पाडी मार्ग पर विकसित किया जा रहा है।

Q2: कल्लाडी टनल साइट पर हुआ हादसा क्या पूरी तरह प्राकृतिक था?

Ans: नहीं, केरल सरकार और स्थानीय मंत्रियों के अनुसार यह एक “मैन-मेड” हादसा है, जो टनल की खुदाई के बाद निकली मिट्टी को वैज्ञानिक तरीके से न हटाने और उसे असुरक्षित रूप से साइट पर डंप करने के कारण हुआ।

Q3: Keralam CM Satheesan ने LDF सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?

Ans: मुख्यमंत्री सतीशन ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने पूर्व में पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के बिना इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का विरोध किया था, तब एलडीएफ और सीपीआई(एम) ने उन्हें ‘विकास विरोधी’ कहकर प्रताड़ित किया था।

Q4: इस हादसे के बाद सरकार ने क्या कानूनी कदम उठाए हैं?

Ans: केरल कैबिनेट ने इस मामले में तकनीकी और कानूनी पहलुओं की जांच के लिए दोहरी जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही केरल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 194 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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