दीपावली पर रीवा के बाजारों में ‘वोकल फॉर लोकल’ की गूंज, क्या स्वदेशी को मिल रही प्राथमिकता?

'Vocal for local' echoes in Rewa markets on Diwali

‘Vocal for local’ echoes in Rewa markets on Diwali: दीपावली के पावन अवसर पर रीवा शहर के बाजार इन दिनों खरीदारों की भारी भीड़ से गुलजार हैं। फोर्ट रोड, शिल्पी प्लाजा और सिरमौर चौराहा जैसे प्रमुख बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं है। हर तरफ उत्साह और खरीदारी का माहौल है। पूजा सामग्री की दुकानों पर विशेष रूप से खरीदारों का तांता लगा हुआ है, जहां लोग दीया, मोमबत्ती, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, रंगोली और अन्य सजावटी सामान खरीदने में व्यस्त हैं। बाजारों में सजे स्टॉल्स और दुकानों की चमक दीपावली के उत्साह को और बढ़ा रही है। दीपों के त्योहार दीपावली की रौनक रीवा के बाजारों में खूब दिखाई दे रही है, लेकिन इस बार एक महत्वपूर्ण सवाल चर्चा का केंद्र बना हुआ है: क्या लोग स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं?

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भारत सरकार लगातार ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में जनता से अपील की थी कि “उसी दुकान से खरीदारी करें, जहाँ भारतीय उत्पाद उपलब्ध हों।” इसी पहल की जमीनी हकीकत जानने के लिए ‘शब्द साँची विंध्य’ की टीम रीवा के बाजारों में पहुँची, जहाँ दिवाली की तैयारियों की चहल-पहल जोरों पर है। टीम ने ग्राहकों और दुकानदारों से बात की, यह जानने के लिए कि क्या लोग सरकार की इस पहल में सहयोग दे रहे हैं या फिर अब भी चाइनीज लाइटें, विदेशी गिफ्ट्स और इंपोर्टेड सजावट के सामान ही उनकी पहली पसंद बने हुए हैं।

दुकानदारों के बोल

अनेक दुकानदारों ने टीम को बताया कि इस बार ग्राहकों का रुझान मिट्टी के दीयों, भारतीय मोमबत्तियों और देश में बनी सजावट की वस्तुओं की तरफ बढ़ा है। एक दुकानदार ने कहा, “पिछले कुछ सालों की तुलना में ग्राहक अब पूछकर भारतीय उत्पाद खरीद रहे हैं। खासकर दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों में स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ी है।” हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स और कुछ फैंसी सजावटी सामानों के मामले में अभी भी चाइनीज या इंपोर्टेड विकल्पों की तरफ झुकाव बना हुआ है, जिसका मुख्य कारण उनकी कम कीमत और व्यापक वैरायटी है।

ग्राहकों की राय

बाजार में खरीदारी कर रहे कई ग्राहकों ने ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल का समर्थन किया। एक गृहिणी ने बताया, “इस बार हमने ज्यादातर दीये, मिट्टी के खिलौने और रंगोली का सामान स्थानीय कारीगरों से खरीदा है। हमें लगता है कि इससे अपने देश के लोगों को मदद मिलती है।” वहीं, कुछ युवा खरीदारों ने कहा कि जहां अच्छी गुणवत्ता के भारतीय विकल्प उपलब्ध हैं, वे उन्हें ही प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन कुछ फैंसी लाइट्स और गिफ्ट आइटम्स के लिए उन्हें विदेशी उत्पादों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

कुल मिलाकर, रीवा के बाजारों में दीपावली की रौनक के बीच ‘वोकल फॉर लोकल’ की गूंज सुनाई दे रही है। लोगों में स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ी है, और कई लोग गर्व से भारतीय सामानों को खरीद रहे हैं। हालांकि, आयातित सामानों का आकर्षण अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम है।

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