अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला क्यों किया? ट्रंप का दावा- मदुरो को पकड़ लिया!

वेनेजुएला के काराकस (Venezuela Caracas Attack) में 3 जनवरी 2026 की सुबह कई जोरदार विस्फोट हुए, जिससे शहर में बिजली गुल हो गई और धुआं उठता नजर आया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया कि यह अमेरिकी सेना की बड़ी सैन्य कार्रवाई (US Military Strikes Venezuela) का हिस्सा है, जिसमें वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो (Nicolas Maduro Arrested) को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह घटना अमेरिका-वेनेजुएला के बढ़ते तनाव (US-Venezuela Confrontation) के बीच हुई, जहां वेनेजुएला ने एक दिन पहले 5 अमेरिकी नागरिकों को गिरफ्तार किया था।

3 जनवरी 2026 को स्थानीय समयानुसार सुबह 2 बजे के आसपास वेनेजुएला की राजधानी काराकस में कम से कम 7 विस्फोट सुनाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सैन्य ठिकानों और अन्य स्थानों से धुआं उठता देखा गया, साथ ही कम ऊंचाई पर उड़ते विमान भी नजर आए। वेनेजुएला सरकार ने इसे अमेरिकी हमला (US Attack Venezuela) बताया और आपातकाल (State of Emergency Venezuela) घोषित कर दिया। अमेरिकी सेना ने उत्तरी वेनेजुएला में कई जगहों पर एयरस्ट्राइक (Airstrikes Venezuela) किए, जिसके परिणामस्वरूप मदुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया। ट्रंप ने घोषणा की कि मदुरो को अमेरिकी कानून प्रवर्तन के साथ समन्वय में पकड़ा गया। इस ऑपरेशन में कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ, लेकिन वेनेजुएला में नागरिकों के हताहत होने की रिपोर्ट्स हैं।

अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला क्यों किया?

Why US Attacked Venezuela : यह सैन्य कार्रवाई अमेरिका और वेनेजुएला के लंबे समय से चले आ रहे विवाद (Venezuela Crisis) का परिणाम है। मदुरो को अमेरिका ने ड्रग तस्करी (Drug Trafficking) और आतंकवाद के आरोप में वांटेड घोषित किया हुआ था। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि मदुरो एक तानाशाह है, जो वेनेजुएला के तेल संसाधनों (Venezuela Oil Resources) पर कब्जा जमाए हुए है और अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा है। एक दिन पहले वेनेजुएला ने 5 अमेरिकी नागरिकों को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसे अमेरिका ने उकसावा माना। ट्रंप ने इसे “वेनेजुएला की आक्रामकता” बताते हुए सैन्य हस्तक्षेप का आदेश दिया। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ऑपरेशन महीनों से तैयार किया जा रहा था, जिसमें कैरिबियन सागर में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी शामिल थी।

ट्रंप ने क्या दावा किया?

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान में कहा कि “अमेरिका ने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हमला किया है और मदुरो को गिरफ्तार (Maduro Captured) कर लिया गया है।” उन्होंने दावा किया कि मदुरो को अमेरिका लाया जाएगा और उस पर मुकदमा चलेगा। ट्रंप ने इसे “अमेरिका की सुरक्षा और लोकतंत्र की जीत” बताया, साथ ही कहा कि मदुरो का शासन समाप्त हो गया है। ट्रंप ने पहले भी मदुरो को “नारको-टेररिस्ट” कहा था और वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाए थे। कुछ आलोचकों का कहना है कि ट्रंप अब पर्सनल बिजनेस के साथ-साथ पर्सनल रिवेंज लेने लग गए हैं, खासकर चुनावी जीत के बाद.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा हुई। रूस (Russia) ने इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन” (Violation of International Law) बताया और कहा कि इसमें कोई आधार नहीं है। ईरान (Iran) ने अमेरिकी हमले की निंदा की और वेनेजुएला की संप्रभुता का समर्थन किया। क्यूबा (Cuba) ने इसे “अमेरिकी साम्राज्यवाद” (US Imperialism) कहा और वैश्विक प्रतिक्रिया की मांग की। कोलंबिया (Colombia) के राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो (Gustavo Petro) ने भी विरोध जताया, हालांकि कोलंबिया अमेरिका का सहयोगी है। अन्य देश जैसे चीन (China) और ब्राजील (Brazil) ने भी चिंता जताई, लेकिन स्पष्ट विरोध नहीं किया। वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रिनो (Vladimir Padrino) ने कहा कि वे विदेशी सैनिकों का प्रतिरोध करेंगे।

क्या ट्रंप और अमेरिका द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई कानूनी है?

कानूनी विशेषज्ञों और सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, यह अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप (US Military Intervention) कानूनी रूप से संदिग्ध है। अमेरिकी कांग्रेस (US Congress) ने इसे अधिकृत नहीं किया है और न ही वेनेजुएला पर युद्ध की घोषणा की गई है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह ऑपरेशन युद्ध शक्तियां के तहत किया गया, लेकिन आलोचक इसे असंवैधानिक मानते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की मंजूरी के बिना किसी देश पर हमला संप्रभुता का उल्लंघन है। अमेरिकी सांसदों जैसे जिम मैकगवर्न (Jim McGovern) ने इसे “अवैध युद्ध” (Illegal War) कहा और कहा कि ट्रंप अमेरिका को अनावश्यक संघर्ष में घसीट रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञ ब्रेनन सेंटर की एलिजाबेथ गूइनाने ने कहा कि यह “कानून प्रवर्तन समस्या को सैन्य औजारों से हल करने” जैसा है। कुल मिलाकर, यह कार्रवाई अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों का उल्लंघन लगती है।

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