UP Voter List Mistake : Ramhit Yadav कैसे हो गया ‘राम ने यादव को मारा’ ? अधिकारी बोले- Software की गलती

UP Voter List Mistake : देश भर में SIR, वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर पहले ही विपक्ष चुनाव आयोग पर हमलावर है। इस बीच उत्तर प्रदेश में हो रहे MLC चुनाव के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है, जिसने चुनावी व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली तकनीक और अधिकारियों की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं लोटर लिस्ट में मतदाता का नाम बदलकर ऐसा दर्ज कर दिया गया, जिसके अर्थ का ही अनर्थ हो गया, तो कहीं पिता के नाम की जगह शैक्षिक योग्यता लिख दी गई। आखिर मतदाता सूची में नामों के साथ इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई? क्या इसके पीछे केवल सॉफ्टवेयर की खामी है या फिर सत्यापन में भी लापरवाही हुई? और चुनाव से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण सूची में ऐसी गलतियां सामने आने के बाद जिम्मेदारी किसकी बनती है? 

‘Ramhit’ को कर दिया ‘राम ने यादव को मारा’

दरअसल, ये मामला झांसी-इलाहाबाद खंड स्नातक विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र का है, जहां मतदाता सूची में अंग्रेजी में दर्ज Ramhit Yadav का नाम हिंदी लिप्यंतरण करते समय ‘रामहित यादव’ होना था, लेकिन मतदाता सूची में इसे ‘राम ने यादव को मारा’ कर दिया। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की लिस्ट यही नहीं खत्म होती बल्कि और भी लंबी है। सूची में ‘मूर्खचंद यादव’, ‘टक्कर मारना’ और ‘अली के पास है’ जैसी दर्ज नामों की गड़बड़ियों भी सामने आई हैं। इस मामले पर पर्दा डालते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण की नई व्यवस्था के दौरान तकनीकी और मानवीय त्रुटियां हो गईं हैं।

हालांकि, निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से मतदाता सूची में गड़बड़ी होने पर स्पष्टीकरण मांगा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को देखिए… जिसे अनुराग वर्मा नाम के यूजर ने पोस्ट किया है।

मतदाता सूची में 158 वोटर्स के नाम गलत 

दरअसल, उत्तर प्रदेश में चल रहे एमएलसी चुनाव के लिए यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इस बार मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए पहली बार ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था अपनाई गई थी। इसी नई प्रक्रिया के दौरान कुछ आवेदनों में नाम और दूसरी जानकारियां गलत तरीके से दर्ज हो गईं। जिसमें झांसी-इलाहाबाद खंड स्नातक विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज नामों में कई त्रुटियां सामने आई हैं। प्रदेश की मतदाता सूची में कुल 14 लाख 81 हजार 310 डाटा है। इनमें से 158 डाटा ऐसा पाया गया, जिनमें मतदाताओं या उनके संबंधियों के नाम गलत दर्ज हो गए हैं। यानी मामला केवल एक या दो नामों तक सीमित नहीं बल्कि 158 वोटर्स की पहचान गलत है या सभी डाटा में एक जैसी गड़बड़ी हुई है।

ट्रांसलिटरेशन से गड़बड़ हुआ Ramhit का नाम 

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा रामहित यादव नाम के वोटर हो रही है, इसमें अंग्रेजी भाषा में लिखे ramhit Yadav के नाम को जब ऑनलाइन ट्रांसलेट किया गया तो हिंदी में रामहित यादव की जगह ‘राम ने यादव को मारा’ लिख दिया गया। इसके पीछे अंग्रेजी से हिंदी में नाम बदलने की प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी को वजह बताया गया है। अब ये भी बता दें कि ये लिप्यांतरण क्यों किया जाता है, तो जब कोई व्यक्ति ऑनलाइन फॉर्म में अंग्रेजी में अपना नाम दर्ज करता है, तो उसे हिंदी में लिखने के लिए लिप्यंतरण यानी ट्रांसलिटरेशन की जरूरत पड़ सकती है। लिप्यंतरण में किसी शब्द या नाम की ध्वनि के आधार पर उसे दूसरी लिपि में लिखा जाता है।

उदाहरण के तौर पर, Ramhit Yadav को उसके उच्चारण के मुताबिक ‘रामहित यादव’ लिखा जाना चाहिए।लेकिन अनुवाद और लिप्यंतरण दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अनुवाद में किसी शब्द का अर्थ दूसरी भाषा में बदला जाता है, जबकि लिप्यंतरण में उसके उच्चारण और लिखने के रूप को दूसरी लिपि में उतारा जाता है। तो यहां गड़बड़ी किसी इंसान ने नहीं की बल्कि सॉफ्टवेयर ने की है, जिसने नाम को हिंदी में लिखने के बजाय उसके अक्षरों और शब्दों की गलत व्याख्या कर दी और नतीजा यह हुआ कि एक व्यक्ति का नाम ही एक वाक्य जैसा बन गया।

इस मामले में केवल नामों के गलत रूप सामने नहीं आए हैं। कुछ प्रविष्टियों में पिता के नाम की जगह ‘B.Com’ जैसी शैक्षिक योग्यता दर्ज मिली। इसके अलावा, मतदाता सूची में ‘मूर्खचंद यादव’, ‘टक्कर मारना’ और ‘अली के पास है’ जैसी असामान्य डाटा का भी जिक्र किया गया है। इस मामले में फतहेपुर की डीएम निधि गुप्ता ने जवाब दिया है।

अधिकारियों ने सॉफ्टवेयर पर मढ़ा दोष 

ऐसे में अब यहां सवाल ये उठता है कि निर्वाचन अधिकारी क्या केवल सॉफ्टवेयर पर निर्भर होकर चुनावी प्रक्रियाओं को पूरा करा रहे हैं? क्या इन सभी गड़बड़ियों का आरोप केवल सॉफ्टवेयर की गलती पर डाल देना सही होगा ? क्योंकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ऑनलाइन पंजीकरण की नई व्यवस्था के दौरान तकनीकी और मानवीय त्रुटियों की बात कही है। लेकिन जब मतदाता सूची तैयार की जा रही थी, तब इन गलतियों को अधिकारियों ने आखिर पकड़ा क्यों नहीं? क्या मतदाता सूची को सॉफ्टवेयर से तैयार करने के बाद अधिकारियों द्वारा जांचा नहीं गया?

इस मामले में CEO ने इन सभी जिलों के डीएम से जवाब स्पष्टीकरण मांगा है। अब देखना ये होगा कि जांच में गड़बड़ी की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है। 

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