यूपी पुलिस SI परीक्षा विवाद, ‘पंडित’ विकल्प पर मचे बवाल पर क्या बोले योगी?

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आयोजित यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा (UP Police Sub Inspector Exam) के एक सवाल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 14 मार्च को हुई परीक्षा में ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाले’ वाक्यांश के लिए एक शब्द पूछते हुए विकल्प दिए गए थे— पंडित, अवसरवादी, निष्कपट और सदाचारी। सही उत्तर ‘अवसरवादी’ माना जाता है, लेकिन विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल होने पर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया।

परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र का यह हिस्सा तेजी से वायरल हुआ और कई लोगों ने कहा कि ‘पंडित’ शब्द को इस तरह इस्तेमाल करना एक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। कुछ लोगों का कहना है कि इस शब्द का अर्थ विद्वान होता है, लेकिन इसे अक्सर ब्राह्मण समुदाय के संदर्भ में भी इस्तेमाल किया जाता है।

भाजपा नेताओं ने उठाई आपत्ति

मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया जब भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के नेताओं ने भी इस सवाल पर आपत्ति जताई। भाजपा नेता अभिजात मिश्रा (Abhijat Mishra) ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रश्न तैयार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि ‘पंडित’ शब्द ज्ञान और धार्मिक सम्मान से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे ऐसे विकल्प में शामिल करना अनुचित है।

इसके अलावा प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर किसी प्रश्न से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचती है तो यह स्वीकार्य नहीं है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए निर्देश

विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने सभी भर्ती बोर्डों को स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या समुदाय की आस्था और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं और जो लोग बार-बार ऐसी गलती करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

भर्ती बोर्ड ने दी सफाई

इस विवाद के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड (Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board) ने भी सफाई जारी की है। बोर्ड के अनुसार प्रश्नपत्र सीधे उनके द्वारा तैयार नहीं किए जाते, बल्कि गोपनीय संस्थाओं से बनवाए जाते हैं ताकि परीक्षा की गोपनीयता बनी रहे।

बोर्ड ने बताया कि प्रश्नपत्र सील्ड पैकेट में परीक्षा केंद्रों पर भेजे जाते हैं और परीक्षा कक्ष में ही पहली बार खोले जाते हैं। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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