अमेरिका (United States) में शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। ‘नो किंग्स रैली’ (No Kings Rally) के नाम से हुए इस प्रदर्शन में करीब 80 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के सभी 50 राज्यों में 3,300 से ज्यादा जगहों पर ये प्रदर्शन आयोजित किए गए, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़े जनआंदोलनों में गिने जा रहे हैं।
अमेरिका (United States) में शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। ‘नो किंग्स रैली’ (No Kings Rally) के नाम से हुए इस प्रदर्शन में करीब 80 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के सभी 50 राज्यों में 3,300 से ज्यादा जगहों पर ये प्रदर्शन आयोजित किए गए, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़े जनआंदोलनों में गिने जा रहे हैं।
आयोजकों का दावा है कि यह प्रदर्शन पिछले अक्टूबर में हुए विरोध से भी बड़ा रहा। इस बार करीब 10 लाख ज्यादा लोग शामिल हुए और लगभग 600 अतिरिक्त कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे साफ है कि ट्रम्प सरकार के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
व्हाइट हाउस का पलटवार
इन प्रदर्शनों पर व्हाइट हाउस (White House) ने तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रशासन ने इन्हें ‘थेरेपी सेशन’ (Therapy Session) करार देते हुए कहा कि आम जनता पर इनका कोई खास असर नहीं पड़ता। वहीं ट्रम्प ने भी खुद को बचाव में कहते हुए साफ किया कि वे कोई ‘राजा’ नहीं हैं और उनके फैसले देश को मजबूत बनाने के लिए हैं।
दुनिया के दूसरे देशों में भी विरोध
यह विरोध सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। फ्रांस (France) की राजधानी पेरिस, ब्रिटेन (United Kingdom) के लंदन और पुर्तगाल (Portugal) के लिस्बन जैसे शहरों में भी लोगों ने सड़कों पर उतरकर ट्रम्प के खिलाफ प्रदर्शन किया। इससे साफ है कि ट्रम्प की नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी
