रीवा में यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर सोमवार को एक अनोखा और आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला। विरोध जताने के लिए प्रदर्शनकारियों ने सवर्ण नेताओं की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली, जिस दौरान कई लोग फफक-फफक कर रोते हुए नजर आए। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी इस अर्थी यात्रा के बाद प्रदर्शनकारियों ने मौके पर ही पिंडदान किया और कुछ युवाओं ने अपने सिर का मुंडन कराकर सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि यूजीसी के उन विवादास्पद नियमों के खिलाफ है जिसे लेकर समाज में भारी नाराजगी है। इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई। प्रदर्शनकारी आशीष तिवारी ने कहा कि इन नियमों को लेकर लगातार आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं, लेकिन सरकार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसी उपेक्षा के चलते सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए यह अनोखा तरीका अपनाया गया है, ताकि इन नियमों को तुरंत वापस लिया जाए।
वहीं, सुलभ मिश्रा ने कहा कि सरकार को जनता की पीड़ा को गंभीरता से समझना चाहिए। अर्थी यात्रा निकालकर और रो-रोकर अपनी नाराजगी इसलिए जाहिर की गई है ताकि शासन-प्रशासन तक स्पष्ट संदेश पहुंच सके। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो रीवा में यह विरोध प्रदर्शन और भी उग्र रूप लेगा तथा आगे भी जारी रहेगा।




