केंद्रीय बजट 2026 की तैयारियों के बीच, भारत का कंज्यूमर और रिटेल सेक्टर इस बार सरकार से बड़े प्रोत्साहन की उम्मीद कर रहा है। वैश्विक अनिश्चितता और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बीच, Union Budget 2026 से घरेलू मांग को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस उपायों की दरकार है। ग्रामीण आय में वृद्धि और करों के सरलीकरण पर उद्योग जगत की विशेष नजर टिकी है।
मांग में सुधार के लिए क्या हैं सेक्टर की उम्मीदें?
भारतीय रिटेल और कंज्यूमर सेक्टर (CPR) देश की जीडीपी में 10% से अधिक का योगदान देता है। 2030 तक इस बाजार के 1.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, मौजूदा समय में बढ़ती लागत और मध्यम वर्ग की सीमित क्रय शक्ति एक बड़ी चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Union Budget 2026 में व्यक्तिगत आयकर में राहत मिलती है, तो लोगों के पास खर्च योग्य आय (Disposable Income) बढ़ेगी, जिसका सीधा असर मांग पर पड़ेगा।
GST युक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर
सितंबर 2025 में जीएसटी काउंसिल द्वारा उठाए गए कदमों के बाद, अब उद्योग जगत को उम्मीद है कि बजट में इस दिशा में और स्पष्टता आएगी। ग्रामीण भारत में मांग बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और कृषि से जुड़े प्रोत्साहनों की जरूरत है। अगर ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह बढ़ता है, तो मास-कंजम्पशन श्रेणियों (साबुन, तेल, बिस्कुट आदि) की बिक्री में उछाल आने की प्रबल संभावना है।
ई-कॉमर्स और D2C के लिए नियमों का सरलीकरण
भारत का डिजिटल रिटेल इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है। लेकिन छोटे ब्रांड्स के लिए ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन पर टीसीएस (TCS) और अलग-अलग राज्यों के जटिल जीएसटी नियम अब भी सिरदर्द बने हुए हैं। उद्योग संगठनों ने मांग की है कि इन अनुपालनों को सरल बनाया जाए। डिजिटल टूल्स जैसे AI-पावर्ड सप्लाई चेन और इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम में निवेश के लिए टैक्स क्रेडिट देने से पारंपरिक रिटेलर्स का आधुनिकीकरण तेज हो सकेगा।

‘मेक इन इंडिया’ और विनिर्माण को बढ़ावा
Union Budget 2026 में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए रियायती कॉर्पोरेट टैक्स व्यवस्था (जैसे पूर्ववर्ती धारा 115BAB) को फिर से शुरू करने की चर्चा जोरों पर है। इसके अतिरिक्त, फूड प्रोसेसिंग और सस्टेनेबल पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए अतिरिक्त कटौती की मांग की जा रही है। ऊर्जा-कुशल मशीनरी पर त्वरित मूल्यह्रास (Accelerated Depreciation) से कंपनियां अपनी सस्टेनेबिलिटी योजनाओं को गति दे सकेंगी।
कस्टम्स ड्यूटी 2.0: व्यापार का नया ढांचा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही संकेत दिया है कि सीमा शुल्क (Customs) सुधार अगला बड़ा मोर्चा होगा। वर्तमान में भारत में आठ कस्टम ड्यूटी स्लैब हैं, जिससे वर्गीकरण के विवाद बढ़ते हैं। उम्मीद है कि बजट में इन्हें घटाकर पांच या छह किया जा सकता है। कच्चे माल, मध्यवर्ती वस्तुओं और तैयार माल के बीच स्पष्ट अंतर करने से घरेलू उत्पादन की लागत कम होगी और वर्गीकरण विवादों से राहत मिलेगी।
डीमर्जर और अनुपालन में स्पष्टता की मांग
कॉर्पोरेट जगत ‘फास्ट-ट्रैक डीमर्जर’ के लिए टैक्स न्यूट्रैलिटी की मांग कर रहा है। वर्तमान में आयकर अधिनियम के तहत कुछ तकनीकी कमियों के कारण कंपनियों को पुनर्गठन में मुश्किल आती है। इसके अलावा, विदेशी कंपनियों के लिए ‘सिग्निफिकेंट इकोनॉमिक प्रेजेंस’ (SEP) के दायरे को स्पष्ट करने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सुगमता आएगी।
Union Budget 2026 केवल एक वित्तीय विवरण नहीं, बल्कि भारत के उपभोग इंजन को रफ्तार देने का एक सुनहरा अवसर है। यदि सरकार टैक्स निश्चितता, सीमा शुल्क में सुधार और लक्षित प्रोत्साहन प्रदान करती है, तो भारत वैश्विक कंज्यूमर गुड्स हब बनने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा सकेगा।
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