Climate Risk : UNICEF की नई रिपोर्ट में सामने आया है कि हमारे भारत में बच्चे तेजी से बढ़ते क्लाइमेट रिस्क का शिकार बनते जा रहे हैं देश में लाखों बच्चे ज्यादातर गर्मी सुख और हीट वेव्स जैसे मौसम के खतरे के सीधे संपर्क में है जिसका असर उनके स्वास्थ्य शिक्षा और विकास पर देखने को मिलता है।
भारत में Climate Risk का बड़ा बोझ
जानकारी के अनुसार भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां बच्चों पर भी Climate Risk का खतरा सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। यहां लगभग 90% से ज्यादा बच्चे किसी न किसी रूप से ज्यादातर एक्सट्रीम हीट की संपर्क में है। इसका मतलब है कि गर्मी अब मौसम की समस्या नहीं बल्कि बच्चों के लिए रोज का एक खतरा है।
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Extreme Heat और Heatwave का खतरा
UNICEF रिपोर्ट से हमें पता चलता है कि भारत में लाखों बच्चे लगातार हीट वेव्स यानी लू के संपर्क में है। ज्यादातर गर्मी होने के कारण बच्चों में डिहाइड्रेशन हीट स्ट्रोक और थकान जैसी दिक्कतें देखने को मिलती है। छोटे बच्चों पर इसका असर भी गंभीर देखने को मिलता है क्योंकि उनका शरीर का तापमान जल्दी संतुलित नहीं हो पाता है।
Drought और पानी की कमी से बढ़ती है मुश्किलें
देश के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति बच्चों के जीवन को प्रभावित कर रही है। पानी की कमी के कारण न सिर्फ पीने के पानी की दिक्कत होती है बल्कि खेती भी प्रभावित होने लगती है। इससे परिवार की इनकम घटती है और बच्चों के पोषण पर इसका असर देखने को मिलता है।
एक साथ कई सारी Climate Risk का सामना
यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में अधिकतर बच्चे एक नहीं बल्कि कई सारे मौसम की रिस्क का सामना कर रहेहैं। इसमें ज्यादातर गर्मी सुखा होना और कभी-कभी बाढ़ जैसे रिस्क भी शामिल होतेहैं। एक साथ कहीं खतरों का असर बच्चों के सेहत और मानसिक विकास दोनों पर देखने को मिलता है जिस कारण पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
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शिक्षा और स्वास्थ्य पर असर
लगातार बढ़ते जाते क्लाइमेट रिस्क का असर बच्चों की शिक्षा पर भी अब देखने को मिल रहा है गर्मी और पानी की कमी के कारण स्कूलों में उपस्थित घटती जा रही है। वहीं स्वास्थ्य के लेवल पर भी कुपोषण संक्रमण और कमजोरी जैसे दिक्कतें देखने को मिलती है।

