UGC Bill 2026: यूजीसी बिल पर मायावती का बड़ा बयान, 3 पॉइंट्स में दी सलाह

Mayawati addressing media while reacting to UGC Bill 2026 and its impact on higher education

देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए लाए गए UGC Bill 2026 पर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की प्रतिक्रिया सामने आई है। 15 जनवरी 2026 से लागू हुए इन नए नियमों को लेकर जहां एक तरफ सवर्ण समाज विरोध कर रहा है, वहीं मायावती ने इसे जातिवादी मानसिकता का परिणाम बताते हुए तीन प्रमुख बिंदुओं पर अपनी राय रखी है।

उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता की नई पहल

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ पेश किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कैंपसों में होने वाले जातीय भेदभाव को रोकना है। इन नियमों के तहत अब प्रत्येक कॉलेज और विश्वविद्यालय में एक ‘समता समिति’ (Equity Committee) का गठन अनिवार्य कर दिया गया है। इस कमेटी में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।

नियमों के अनुसार, ओबीसी वर्ग के छात्र, शिक्षक और अन्य कर्मचारी अब अपनी शिकायतें सीधे इस कमेटी के समक्ष रख सकेंगे। हालांकि, इस कमेटी में सामान्य वर्ग (सवर्ण) का प्रतिनिधित्व न होने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सवर्ण समाज का मानना है कि यह उनके अधिकारों का हनन है और इसी आधार पर देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

UGC Bill 2026: मायावती का कड़ा रुख

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने इस विरोध को पूरी तरह से गलत बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के समाधान के लिए ‘इक्विटी कमेटी’ बनाना एक जरूरी कदम है। उनके अनुसार, सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इसे अपने खिलाफ साजिश मानना उनकी जातिवादी मानसिकता को दर्शाता है। मायावती ने स्पष्ट किया कि इस तरह के सकारात्मक बदलाव का विरोध करना कतई उचित नहीं है।

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सामाजिक तनाव और संवाद की कमी

मायावती ने अपने बयान में सरकार को भी घेरते हुए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील नियमों को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लेना चाहिए था। उनका मानना है कि अगर पहले संवाद स्थापित किया जाता, तो देश में सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा नहीं होती। बसपा प्रमुख ने सरकारों और संस्थानों को भविष्य में इस तरह की प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता बरतने की सलाह दी है।

स्वार्थी नेताओं से सावधान रहने की अपील

दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को संबोधित करते हुए मायावती ने उन्हें ‘बिकाऊ और स्वार्थी’ नेताओं से बचने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि कुछ नेता अपनी ‘घिनौनी राजनीति’ चमकाने के लिए भड़काऊ बयानबाजी करते हैं। उन्होंने पिछड़े वर्गों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और अपनी बुद्धिमत्ता से काम लें। मायावती ने जोर देकर कहा कि इन वर्गों के लोगों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना होगा और राजनीतिक मोहरों के जाल में फंसने से बचना होगा।

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