सवर्ण विरोधी UGC Act को लेकर पूरे देश में विरोध! जानें पूरा मामला

UGC Act Protest: देशभर में सामान्य वर्ग के छात्र और सवर्ण जाति के लोग यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के बनाए नए नियमों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं. केंद्र सरकार और भाजपा सवर्ण विरोधी यूजीसी एक्ट (UGC Act) के पक्ष में है लेकिन यह नियम पूरी तरह से पक्षपाती साबित होते हैं जिसका इस्तेमाल जनरल कैटेगरी के छात्रों का करियर बर्बाद करने में इस्तेमाल किया जा सकता है ठीक वैसे ही जैसे ST-SC Act का होता आया है.

पत्रकार अजीत भारती ने सबसे पहले यह मुद्दा उठाकर सरकार और UGC को घेरा। उन्होंने UGC Act का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जबकि अजीत भारती पर प्रो बीजेपी सपोर्टर होने के आरोप लगते हैं. इस मामले में मोदी विरोधी UGC Act के हिमायती बन गए और भाजपा सपोर्टर केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर होने लगे.

नई दिल्ली में UGC हेडक्वार्टर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रदर्शनकारियों को कैंपस के अंदर घुसने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में बैरिकेड्स लगाए गए हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, रायबरेली, वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज और सीतापुर में छात्रों, युवाओं और विभिन्न संगठनों ने जगह-जगह प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजी हैं।

यूपी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया है।

UGC के नए नियमों को लेकर कुमार विश्वास ने तंज कसा। सोशल मीडिया पर लिखा, ‘चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं… मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा।’

UGC Act विवाद की वजह

UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026 (The Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026)।’ इसके तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं।

ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा है।

इस एक्ट का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी।

UGC Act के प्रावधान

1. जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा

The Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 में कहा गया है, ‘जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, पैदाइश के स्थान, विकलांगता के आधार पर कोई भी अनुचित या पक्षपाती व्यवहार, जो पढ़ाई में बराबरी में बाधा बने या मानव गरिमा के खिलाफ हो, उसे जातिगत भेदभाव माना जाएगा।’ जबकि ड्राफ्ट में जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा नहीं थी।

2. परिभाषा में OBC को भी शामिल किया गया

इस परिभाषा में ‘SC/ST के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC छात्रों को शामिल किया गया है। कहा गया है कि इनके खिलाफ किसी भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार को जाति-आधारित भेदभाव माना जाएगा। जबकि ड्राफ्ट में OBC को शामिल नहीं किया गया था।

3. झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान हटाया गया ड्राफ्ट में झूठी शिकायतों को कम करने के लिए प्रावधान था। इसमें कहा गया था कि अगर झूठी या जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण तरीके से किसी के खिलाफ शिकायत की गई, तो शिकायत करने वाले को आर्थिक दंड या कॉलेज से सस्पेंड भी किया जा सकता है। अब लागू हुए फाइनल नियमों से ये प्रावधान हटा लिया गया है।

समस्या इसी बात की है कि झूठी शिकायत करने का प्रावधान हटा दिया गया. जब किसी छात्र को यह डर ही नहीं होगा कि उसके झूठी शिकायत करने के बाद भी उसपर कोई एक्शन नहीं होगा तो इसका शिकार हर सवर्ण छात्र बनेगा। कॉलेज में आपसी लड़ाई, मन मुटाव, प्रेम संबंध का रिजेक्शन जैसी घटनाओं पर सवर्णों को निशाना बनाया जाएगा।

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