Tribal widow attempts self-immolation to save land: मऊगंज जिले में अवैध खनन और भूमि विवाद ने एक दर्दनाक रूप ले लिया है। हर्रहा ग्राम पंचायत की रहने वाली आदिवासी विधवा ललिता मौर्या ने अपनी पट्टे की जमीन बचाने और मुआवजे की मांग को लेकर जनसुनवाई के दौरान खुद पर पेट्रोल उड़ेलकर आत्मदाह की कोशिश की। गनीमत रही कि अपर कलेक्टर पीके पांडे ने तत्काल कार्रवाई करते हुए माचिस छीन ली और महिला को रोक लिया। इस घटना से प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मच गई।
घटना बुधवार शाम करीब 4 बजे कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान हुई। ललिता मौर्या रोते-बिलखते कलेक्टर के समक्ष पहुंचीं और अपनी जमीन पर हो रहे अत्याचार की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि पति की मौत के बाद पिछले दो साल से उनकी पट्टे वाली जमीन पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है। आरोपियों ने 80 से 100 फीट गहरे गड्ढे खोदकर पत्थर निकाल लिए और बेच दिए। अब उसी जमीन की लीज को वैध बनाने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि महिला को न तो कब्जा मिल रहा है और न ही कोई मुआवजा।
ललिता मौर्या ने उपेंद्र सिंह और अरुण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एग्रीमेंट के नाम पर धोखाधड़ी की गई, धमकियां दी गईं और पैसे मांगने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई। महिला ने बताया कि वह आठ बच्चों की मां हैं और इस अन्याय से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
उल्लेखनीय है कि घटना से महज दो दिन पहले ही संयुक्त जांच दल ने इसी क्षेत्र में अवैध उत्खनन पकड़ा था और मशीनें जब्त की थीं। इसके बावजूद उसी जमीन की लीज संबंधित सुनवाई आयोजित की गई, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि खदान का 80% हिस्सा पहले ही साफ कर लिया गया है और पत्थर गायब हो चुके हैं, लेकिन अब लीज वैध करने की कोशिश हो रही है।
अपर कलेक्टर पीके पांडे ने बताया कि दोनों पक्षों से दस्तावेज मंगवाए गए हैं। तथ्यों की जांच के बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित जांच शुरू कर दी है।यह घटना अवैध खनन, भूमि माफिया और गरीब आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय को उजागर करती है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और पीड़ित महिला को तुरंत न्याय मिले।
