एमपी। मध्यप्रदेश में गौ-पालन और दुग्ध उत्पादन की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है और राज्य सरकार इसे बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है और यह राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सरकार निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए स्वावलंबी गौशालाओं (कामधेनु निवास) और गौ वत्सपालन प्रोत्साहन योजना जैसी कई योजनाओं का संचालन कर रही है, जिसमें अनुदान भी दिया जाता है। प्रदेश में मालवी और निमाड़ी जैसी मजबूत देशी गोवंश नस्लें पाई जाती हैं जो कृषि और दुग्ध दोनों के लिए उपयोगी हैं। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए डेयरी फार्मिंग और गौ-पालन में निजी निवेश व स्वावलंबी मॉडल को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
एमपी की सबसे बड़ी गौशाला
मध्य प्रदेश की वर्तमान में सबसे बड़ी और उन्नत आदर्श गौशाला ग्वालियर के मुरार क्षेत्र स्थित लाल टिपारा में स्थित है। यहाँ लगभग 10,000 गोवंश के रहने की व्यवस्था है। बीमार और घायल गायों के इलाज के लिए यहाँ आधुनिक म्यूजिक थेरेपी (मुरली की धुन) का उपयोग किया जाता है। यहाँ गोबर और गौमूत्र से विभिन्न प्रकार के उत्पाद (जैसे बायोगैस, खाद आदि) भी बनाए जाते हैं।
गौपालन और दुग्ध उत्पादन पर सरकार कर रही मदद
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और गौवंश संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए गौशालाओं और डेयरी इकाइयों को आर्थिक सहायता व सब्सिडी प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, राज्य में 25 गायों की गौशाला या डेयरी इकाई खोलने पर पशुपालकों को 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। प्रदेश सरकार ने गौशालाओं में पल रहे मवेशियों के लिए चारे और पोषण के लिए सहायता राशि 20 रूपए प्रतिदिन प्रति गाय से बढ़ाकर 40 रूपए प्रतिदिन प्रति गाय कर दी है।
स्वावलंबी गौशाला (कामधेनु आवास) नीति
निराश्रित गौवंश के संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस नीति के तहत बड़े पैमाने पर गौवंश आश्रय व शासकीय भूमि के उपयोग के अधिकार (यूजर राइट्स) का प्रावधान किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल (दुग्ध राजधानी) बनाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और किसानों व पशुपालकों की आय को मजबूत करना है।
बांसुरी की धुन (म्यूजिक थेरेपी) से गायों का इलाज
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित आदर्श गौशाला (जो राज्य की सबसे बड़ी गौशालाओं में से एक है) और खरगोन की श्री माधव आश्रम गौशाला में बीमार और घायल गायों को ठीक करने के लिए बांसुरी की धुन और म्यूजिक थेरेपी का उपयोग किया जा रहा है।
- असर: डॉक्टरों और गौशाला संचालकों का दावा है कि सुबह और शाम के समय धीमी गति में बांसुरी की तान सुनने से गायों का तनाव कम होता है, उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बीमारियों या चोटों से बहुत जल्दी रिकवर (स्वस्थ) हो रही हैं।
- वैज्ञानिक आधार: यह देखा गया है कि शांत और मधुर संगीत से दुधारू पशुओं के शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्राव बेहतर होता है, जिससे दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।
गौपालन पर 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पशुपालकों की आय बढ़ाने और डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए ₹10 लाख तक की सब्सिडी देने की बड़ी घोषणा की है:
- योजना: इस योजना के तहत यदि कोई पशुपालक या युवा 25 स्वदेशी गायों की गौशाला या डेयरी यूनिट स्थापित करता है, तो सरकार की तरफ से प्रोजेक्ट लागत पर अधिकतम ₹10 लाख तक का अनुदान (सब्सिडी) प्रदान किया जाएगा।
- पात्रता व उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए किसान, युवा और स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाएं इसका लाभ उठा सकती हैं। इस राशि का उपयोग गौशाला के आधुनिक शेड निर्माण, उत्तम नस्ल की गायों की खरीद और आवश्यक उपकरणों के लिए किया जा सकता है।




