मां नर्मदा जंयती। हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को प्रतीक के रूप में मां नर्मदा नदी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन भक्त नर्मदे हर के जयकारे लगाते हुए नदी में स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं, क्योंकि माना जाता है कि यह दिन सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति दिलाता है।
25 जनवरी को होगा आयोजन
मोरटक्का नर्मदा तट पर मां नर्मदा जयंती का भव्य आयोजन 25 जनवरी को होगा, जिसमें पुष्प वर्षा और महाआरती शामिल है। तीन दिन चलने वाले इस आयोजन को लेकर तैयारी की जा रही है। कार्यक्रम को लेकर जो जानकारी आ रही है उसके तहत 25 जनवरी दोपहर 12 बजे मां नर्मदा का जन्म महोत्सव के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा शाम 7.30 बजे मां नर्मदा के तट पर महाआरती का भव्य आयोजन किया जाएगा। बढ़ते जलस्तर से आयोजन समिति ने हादसे की आशंका जताई है।
ओंकारेश्वर में 1989 से चली आ रही परंपरा
भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की पावन नगरी से जुड़ा यह आयोजन जय मां नर्मदा युवा संगठन द्वारा वर्ष 1989 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। बीते तीन दशकों से अधिक समय से यह आयोजन नर्मदा भक्तों के लिए आस्था का महापर्व बन चुका है। इस वर्ष भी सैकड़ों स्वयंसेवक एवं नर्मदा सेवक आयोजन को भव्य रूप देने में जुटे हुए हैं।

नर्मदा जयंती का महत्व और कथा
जन्म का कारण- पौराणिक कथाओं के अनुसार, नर्मदा नदी का जन्म भगवान शिव के पसीने की बूंदों से हुआ था, जब वे मेकल पर्वत पर तपस्या कर रहे थे; इसलिए उन्हें शिव की पुत्री भी कहा जाता है।
वरदान- शिवजी ने नर्मदा को अजर-अमर होने और दक्षिण भारत की गंगा के रूप में प्रसिद्ध होने का वरदान दिया।
पवित्रता- नर्मदा नदी को पुण्यसलिला, जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी माना जाता है, जिसके दर्शन मात्र से कष्ट दूर होते हैं।
कैसे मनाई जाती है
पवित्र स्नान- भक्त नर्मदा नदी में स्नान करते हैं, जिससे पापों से मुक्ति मिलती है।
पूजा-अर्चना- घाटों पर विशेष पूजा, आरती, और नर्मदे हर के जयकारे लगते हैं।
दीपदान- आटे के दीयों से दीपदान किया जाता है।
संकल्प- नदी को प्रदूषण मुक्त रखने का संकल्प लिया जाता है।
