ऐसा भी होता है ! ये सच है या सपना

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Hindi Story:रात काफी हो चुकी है पर मुझे नींद नहीं आ रही है जाने क्यों मुझे घर के बाहर लगे पीपल के पेड़ की पत्तियों के हिलने की आवाज़ सोने नहीं दे रही है ऐसा लग रहा है जैसे कोई मुझे बुला रहा है क्यों न ज़रा खिड़की से झाँक कर देखूँ ऐसा क्यों लग रहा है ,मैंने बड़ी हिम्मत करके खिड़की का पर्दा हटाया और पेड़ को ग़ौर से देखा तो ऐसा लगा पलकों पर किसी ने हाँथ रख दिया है और मै मदहोशी में अपने बिस्तर पर आकर सो गई।

सुबह उठी तो लगा जैसे बड़ी गहरी और आराम दायक नींद से जगी हूँ फिर रात की ये बात याद आई तो लगा शायद सपना था और ये सोचकर मै अपने काम में लग गई, दिनभर तो काम में बीत गया पर जब रात हुई तो फिर मुझे बेचैनी सी होने लगी और मुझे थोड़ा डर भी महसूस हुआ कि ये क्या हो रहा है मेरे साथ ,पापा ,मम्मी के कार एक्सीडेंट में गुज़र जाने के बाद मै घर में अकेली ही रहती थी हालाँकि मेरे दूर के रिश्तेदार रहते थे घर के अगल – बगल लेकिन खाना -पीना देने के अलावा उन्हें मेरे लिए कुछ और ज़्यादा करना न पड़े इसलिए ज़्यादातर दूर ही रहते थे।

मेरी स्टडी टेबल थी खिड़की के सामने तो मै वहीं कुछ पढ़ने बैठ गई ,पर मेरा मन नहीं लगा क्योंकि आज फिर वही कल वाला एहसास मुझे सताने लगा और मुझे महसूस हुआ कि जैसे कोई मुझे बुला रहा है मै ख़ुद को रोक नहीं पाई और आखिरकार मैंने पर्दा हटा कर फिर पेड़ की तरफ देख ही लिया और बस एक मदहोशी के साथ मै बैठे -बैठे ही सो गई , जब सुबह सूरज की रौशनी से मेरी आँख खुली तो चैन की नींद के एहसास के साथ मुझे ये भी यक़ीन हो गया कि पिछले दो दिनों से मै कोई सपना नहीं देख रही हूँ बल्कि ये एक हक़ीक़त है, मुझे कोई चैन की नींद सुला रहा था।

ख़ैर मैंने किसी से कुछ नहीं कहा और अपने घर की साफ – सफाई की फिर ताई के घर चली गई वहाँ भी जाके घर के काम में लग गई खाना बनाया और पूरे घर को खाना देने के बाद खुद भी खाना खाने बैठ गई, इतने में ताई जी ने आवाज़ दी और कहा मधु मेरे पैर दबा दे, मैंने कहा जी आती हूँ और बस जल्दी से खाना ख़तम किया और ताई जी के पैर दबाने चली गई थोड़ी देर बाद आई तो रसोई साफ़ की और बस बैठी ही थी कि ताई जी का बेटा रवि आया और कहने लगा -मधु तुम भी तो थक गई होगी न चलो मै तुम्हारे पैर दबा दूँ , पर मुझे न उसकी बात अच्छी लगी न लहजा और मै उठ के शाम के चाय नाश्ते की तैयारी में लग गई ,पर वो मेरे आगे पीछे ही घूमता रहा ,इतने में चाची की बेटी ख़ुशी आ गई और रवि रसोई से चला गया।

किसी तरह रात के खाने के बाद मै काम समेट कर अपने घर आ गई और दरवाज़ा उढ़का लिया मै जैसे ही अंदर आई रवि दरवाज़े पर आकर दरवाज़ा खटखटाते हुए कहने लगा मधु दरवाज़ा खोलो मै हूँ रवि, मै ये सोचकर घबरा गई कि मैंने दरवाज़े का कुंडा नहीं लगाया है और मैंने दरवाज़े की तरफ देखा तो मुझे दिखा कि दरवाज़ा पोला तो हो रहा है लेकिन रवि से खुल नहीं रहा है जैसे कुंडा लगा हो तो मुझे थोड़ी हिम्मत आई और मैंने रवि को डाँटते हुए कहा यहाँ से चले जाओ वर्ना मै शोर मचाऊँगी अभी बहोत रात नहीं हुई है सब जग जाएँगें और फिर तुम्हारी ख़ैर नहीं ये सुनकर रवि चला गया और मेरी जान में जान आई।

पर फिर वही अहसास, जैसे मुझे किसी ने अपनी आग़ोश में ले लिया हो और मै बेफिक्र होकर चैन की नींद सो गई। अगले दिन जब सुबह उठी तो सबसे पहले मेरी नज़र दरवाज़े के कुंडे पर पड़ी जो सच में खुला था और मैंने दरवाज़ा खोला तो वो आसानी से खुल भी गया , मेरी कुछ समझ में नहीं आया और रह -रह के मुझे ये ख्याल आता रहा कि आखिर रवि के धक्का देने से दरवाज़ा क्यों नहीं खुला मेरा मन इसी गुत्थी को सुलझाने में लगा था कि रवि मेरे ताई जी के घर जाते ही मिल गया और कहने लगा आज अगर तुमने दरवाज़ा नहीं खोला मै तुम्हारा अपने घर में खाना -पीना बंद करवा दूँगा, तुम मेरी दूर की रिश्तेदार हो इसके अलावा और कुछ नहीं।

रवि की ये बात सुनकर मेरे हाँथ पैर काँपने लगे मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आज रात मै रवि से कैसे बचूँगी और जब रात हुई तो मैंने घर जाते ही अपने घर का दरवाज़ा अच्छे से बंद किया और उससे सट कर खड़ी हो गई कि रवि भी दौड़ता हुआ मेरे पीछे आ गया और कहने लगा देखो मधु सीधी तरह मान जाओ दरवाज़ा खोल दो वरना मै सबसे कह दूँगा की तुम चरित्रहीन हो ,ये सुनकर मै डर गई और जैसे ही उसने ज़रा तेज़ आवाज़ में मेरा नाम लिया मैंने दरवाज़ा खोल दिया।

रवि ये देखकर मुस्कुराया और मेरे कमरे के अंदर आ गया फिर कहने लगा मधु मै तुम्हारा बुरा नहीं चाहता बस तुम मुझे ख़ुश करती रहो और मै पूरी ज़िंदगी तुम्हारा ख़्याल रखने के लिए तैयार हूँ, फिर मेरे दुपट्टे की ओर हाँथ बढाया पर मैंने देखा कि मेरा दुपट्टा उसके हाँथ से फिसला जा रहा था उसके पकड़ में ही नहीं आ रहा था ,फिर दुपट्टा छोड़कर उसने मुझे पकड़ने की कोशिश की पर मानो जैसे उसके हाँथ भी मेरे बदन को छू ही नहीं पा रहे थे और ये देखकर वो पागलों की तरह हँसता हुआ ख़ुद ब ख़ुद मेरे कमरे से बाहर निकल गया।

मै ख़ुश तो थी कि अब रवि मुझे कभी परेशान नहीं करेगा लेकिन इस बात से परेशान थी कि कोई ताक़त तो है मेरे आस-पास, मैंने दरवाज़ा बंद किया और धीरे से आवाज़ दी -कौन है ? कोई है मेरे पास तो सामने आओ फिर खिड़की के पर्दे हिले पीपल के पत्ते ज़ोर से हिलते हुए कुछ सरगोशियाँ करने लगे और मेरे बिलकुल पास से आवाज़ आई- ‘क्या तुम चाहती हो मै तुम्हारे सामने आ जाऊँ’ ‘मैंने कहा हाँ ‘ फिर उसने कहा -‘कल मै तुम्हारे सामने आकर तुम्हारा साथ माँगूँगा क्या मुझे दोगी अपना साथ अपना प्यार’ ,मैने कहा- ‘हाँ देखूँगी सोचूँगी !’ पर इससे पहले कि मै कुछ ज़्यादा बात करती फिर वही मदहोशी की कैफियत मुझ पर सवार हुई और मै सो गई।

अगले दिन मै सुबह उठी तो मैंने तय किया अब मै ताई जी के घर नहीं जाऊँगी और नहा धोकर मै कोई छोटी -मोटी नौकरी ढूँढने निकल पड़ी, एक ऑफिस के बाहर पहुँची तो काफी भीड़ दिखी ,पूछा की क्या बात है तो पता चला कि वहाँ इंटरव्यू हो रहे हैं तो मै भी बैठ गई कि शायद मेरे लिए भी कोई पोस्ट हो और जब सारे लोगों का इंटरव्यू हो गया तो मैंने मैनेजर को अपनी डिग्री और सर्टिफिकेट दिखाए और पूछा कि क्या मुझे कोई नौकरी मिल सकती है तो उसने जवाब दिया आप अपना बायोडाटा दे दीजिये मै बताता हूँ, कुछ देर बाद वो लौटा और बोला जाइये सर आपको बुला रहे हैं।

मै अंदर गई और उन्होंने जो कुछ पूछा बस उसका जवाब देती गई फिर उन्होंने कहा ठीक है आप कल से जॉइन कर लीजियेगा मुझे तो यक़ीन ही नहीं हो रहा था कि मुझे नौकरी मिल गई है, मै उठ के जाने लगी तो सर ने मुझसे कहा सुनिए मैनेजर से मिलके जाइएगा ,मैंने जवाब दिया जी सर।

बाहर आई तो मैनेजर साहब से मिली और उन्होंने मुझे बधाई देते हुए वेटिंग रूम में बैठने को कहा जहाँ शायद सेलेक्ट हुए लोग बैठे हुए थे और उनके लंच का इंतज़ाम था मुझे भी बैठाया गया, फिर खाना लगा और मैंने सबके साथ खूब जमके खाना खाया क्योंकि भूख तो मुझे इतनी ज़ोर से लगी थी कि मै अगर थोड़ी देर और न खाती तो शायद बेहोश हो जाती।

मै ऑफिस से निकली तो बारिश होने लगी और मेरे पास पैसे भी नहीं थे कि मै ऑटो कर लेती तो मै एक स्टॉप पर रुक गई और सोचा बारिश रुक जाएगी तब चली जाउँगीं पर अँधेरा होने लगा और बारिश थमने का नाम ही नहीं ले रही तो मै चल पड़ी और पीछे से एक गाड़ी आई और और मेरे बगल में आकर रुक गई फिर काँच खुला और मुझे सर दिखे जिन्होंने मेरा इंटरव्यू लिया था बोले चलिए मै आपको घर छोड़ दूँ मै भी मना नहीं कर पाई और गाड़ी में बैठ गई।

रास्ते में उन्होंने थोड़ी -बहोत बातें मेरी फैमिली के बारे में पूछीं और मैंने उन्हें जवाब दिया फिर कहने लगे मधु जी आपको पता है ये इंटरव्यू आपने किसके लिए दिया है और आप किस पोस्ट के लिए सेलेक्ट हुई हैं ,मैंने कहा नहीं सर, मैनेजर साहब ने कहा कम कल समझा देंगे ,मेरी बात सुनकर वो बोले कोई बात नहीं मै आपको बता दूँ आपको मैंने उन लड़कियों में चुना है जो मेरी पत्नी बनने के लायक़ हैं ये बात राज़ इसलिए रखी गई क्योंकि हर लड़की मुझसे शादी करना चाहती है, अब आप बताएँ क्या आप मुझसे शादी करना चाहेंगीं मैंने बड़ी कश्मकश में जवाब दिया ‘हाँ’।

मेरी ‘हाँ’ सुनकर वो बोले आप शायद बहोत परेशान हैं इसलिए ‘हाँ’ कर दिया, थोड़ा मुझे जान लीजिये शायद आपका इरादा बदल जाए ,क्या आप थोड़ा वक़्त मेरे साथ गुज़ारना चाहेंगीं फिर सोच समझकर जवाब दीजियेगा ,मैंने भी कह दिया- ‘जी ठीक है’ और वो मुझे एक रेस्टोरेंट में ले गए जहाँ बैठकर हम दोनों ने ढेर सारी बातें कीं , मुझे ऐसा लगा जैसे मै उन्हें बहोत पहले से जानती हूँ और वो मेरे बॉस नहीं बल्कि दोस्त हैं फिर वो बोले क्या अभी भी आपकी हाँ है, तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा जी, अब तो पक्की वाली हाँ है ,तो उन्होंने थैंक यू कहते हुए, मुझे अँगूठी पहना दी और एक मोबाइल फोन दिया बोले आप जब चाहें मुझसे बात कर सकती हैं और अब कल ऑफिस आने की ज़रूरत नहीं है चलिए मै आपको घर छोड़ दूँ।

वो मुझे घर के बाहर छोड़कर चले गए, मै घर के अंदर पहुँची तो वो अनजानी मौजूदगी कल से कहीं ज़्यादा थी और मुझे फ़ौरन ये याद आ गया कि कल रात इसी मौजूदगी के एहसास ने मुझसे बात की थी और वादा किया था कि आज वो मेरे सामने आएगा मै ये सोच ही रही थी कि फिर एक सुकून भरा एहसास मुझ पर हावी हुआ और मै चैन की नींद सो गई।

सुबह उठी तो इस बारे में ज़्यादा सोचती इससे पहले बेल बजी और मैंने दरवाज़ा खोला तो मैनेजर साहब खड़े थे और गुडमॉर्निंग मैम कहते हुए बोले सर ने आपके लिए नाश्ता और कुछ सामान भिजवाया है, वो आपको कॉल करेंगें मैंने कहा ठीक है और सामान रखवा लिया ,फिर मैंने बैग खोले तो देखा उसमें नाश्ते के अलावा ज्वेलरी और कपड़े भी थे ,मैंने नाश्ता किया और सर को फोन करने ही वाली थी कि उनका फोन आ गया कहने लगे आपको अच्छा लगा ,मैंने कहा हाँ बहोत अच्छा पर इसकी क्या ज़रूरत थी तो वो बोले ज़रूरत थी क्योंकि मै आ रहा हूँ आपके घर रिश्ता लेकर आपको जिसको बताना हो आप बता दीजिये।

ये सुनकर मै दौड़ी – दौड़ी गई ताई और चाचियों के पास और उन्हें बताया कि आदित्य राठौर नाम के बिज़नेस मैन मुझसे शादी करना चाहते हैं और वो घर आ रहे हैं, सबको लगा मै मज़ाक़ कर रही हूँ पर थोड़ी ही देर में उनकी गाड़ी दरवाज़े पे रुकी और वो बड़े लाव लश्कर के साथ आए और सबने उनका रिश्ता क़ुबूल कर लिया फिर बड़ी धूम धाम से चार दिन बाद हमारी शादी हुई।

इस बीच कोई दिन ऐसा न गुज़रा जब मेरे साथ वो अनजाना एहसास न रहा हो फिर मै जब शादी के बाद आदित्य के महल जैसे घर पहुँची तो वो अनजानी खुशबू वहाँ पहले से मौजूद थी जिसके बारे में मै आदित्य को बताना चाहती थी फिर मेरे क़दम ज़रा सा लड़खड़ाए और मुझे लगा जैसे किसी ने मुझे थाम के गिरने से बचा लिया हो ,तभी आदित्य मुझे बाहें फैलाए सामने दिखा और उसके पास जाते ही मुझे ये यक़ीन हो गया कि इतने दिनों से मै उसी की आग़ोश में थी।

हालाँकि अपनी बाँहों में लेकर उसने मुझसे पूछा क्या कुछ पूछना चाहती हो मधु ,मेरे बारे में कुछ और जानना चाहती हो तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा नहीं कुछ नहीं। आज हमारी शादी को पाँच साल बीत गए हैं और खुशियों का ये सिलसिला आज भी वैसा ही बरक़रार है जैसा कल था।

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