भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार सरकारी नौकरी में दो-बच्चों की पाबंदी को हटने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इस पर सहमति बन गई है। इसे जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा। इसके बाद तीसरी संतान होने पर किसी कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जा सकेगा।
समिति की सहमति, कैबिनेट में रखा जाएगा प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से परामर्श के बाद नियम में संशोधन का जो प्रस्ताव तैयार किया था, उसे मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति ने हरी झंडी दे दी है। अब इसे अंतिम निर्णय के लिए आगामी कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।
दिग्विजय सिंह सरकार ने किया था संशोधन
मध्य प्रदेश में 26 जनवरी 2001 से यह प्रविधान है कि तीसरा बच्चा होने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी, साथ ही जो पहले से नौकरी में होंगे और निर्धारित अवधि के बाद तीसरी संतान होने पर सेवा समाप्त हो जाएगी। ज्ञात हो कि यह प्रतिबंध 2001 में दिग्विजय सिंह सरकार ने सिविल सेवा नियम, 1961 में संशोधन कर लागू किया था।
- नियम का बदलाव: 26 जनवरी 2001 से लागू नियम, जिसमें तीसरी संतान होने पर नौकरी से अयोग्य घोषित किया जाता था, उसे हटाया जा रहा है।
- कर्मचारियों को राहत: 30,000 से अधिक शिक्षकों सहित हजारों कर्मचारियों को बर्खास्तगी के डर से मुक्ति मिलेगी।
- भर्ती में पात्रता: नई सरकारी भर्तियों में भी तीन संतान वाले उम्मीदवार अब पात्र माने जाएंगे।
- प्रक्रिया: मोहन यादव सरकार के अधीन सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
- प्रभाव: यह निर्णय व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और पहले से कार्यरत कर्मचारियों की कानूनी लड़ाई खत्म करने के लिए लिया जा रहा है।
