मुसलमानों के लिए बीजेपी में नहीं कोई जगह? सच जान लो

List Of Muslim Leaders In BJP: हाल के दिनों में कुछ लोग भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर ये आरोप लगा रहे हैं कि पार्टी अपने मुस्लिम नेताओं, जैसे शाहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) और मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar Abbas Naqvi) को तवज्जो नहीं दे रही है। सोशल मीडिया पर ये दावा भी किया जा रहा है कि बीजेपी में कोई मुस्लिम विधायक (Muslim BJP MLA) नहीं है और न ही कोई मुस्लिम नेता (Muslim Leaders Of BJP) बड़ी पोजीशन पर है। लेकिन ये आरोप तथ्यों से परे हैं। बीजेपी ने न सिर्फ अपने मुस्लिम नेताओं को अहम (Muslim Leaders In Top Position In BJP) जिम्मेदारियां दी हैं, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिकाएं सौंपी हैं। आइए, तथ्यों के आधार पर इन दावों को खारिज करते हैं और देखते हैं कि बीजेपी ने अपने मुस्लिम नेताओं को कैसे सम्मान और जिम्मेदारी दी है।

बीजेपी के मुस्लिम नेता

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शाहनवाज हुसैन और मुख्तार अब्बास नकवी बीजेपी के उन प्रमुख चेहरों में से हैं, जिन्होंने पार्टी और देश की सेवा में अहम योगदान दिया है। शाहनवाज हुसैन, जो बिहार से ताल्लुक रखते हैं, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। उन्हें नागरिक उड्डयन और उद्योग जैसे बड़े मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई थी। उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की भूमिका भी सौंपी, जो आज भी जारी है। हाल ही में मार्च 2025 में, शाहनवाज हुसैन ने बिहार में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को सफल बताते हुए एनडीए की जीत का दावा किया, जिससे साफ है कि वो पार्टी में सक्रिय और प्रभावशाली हैं। ये कहना कि उनकी राजनीति खत्म हो गई, पूरी तरह गलत है।

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इसी तरह, मुख्तार अब्बास नकवी का नाम भी बीजेपी के सबसे कद्दावर नेताओं में शुमार है। नकवी ने नरेंद्र मोदी सरकार में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का नेतृत्व किया और 2021 में राज्यसभा में उपनेता की जिम्मेदारी संभाली। उनका कार्यकाल जुलाई 2022 में खत्म होने के बाद भी पार्टी ने उन्हें नजरअंदाज नहीं किया। हाल के दिनों में, दिसंबर 2024 में प्रयागराज में एक कार्यक्रम में नकवी ने सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए बीजेपी की नीतियों का समर्थन किया। उनकी सक्रियता और बयानों से साफ है कि वो पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर अहम भूमिका निभा रहे हैं। ये दावा कि उन्हें घर बिठा दिया गया, हकीकत से कोसों दूर है।

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बीजेपी में मुस्लिम नेताओं की मौजूदगी सिर्फ इन दो नामों तक सीमित नहीं है। पार्टी ने कई अन्य मुस्लिम नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी हैं। उदाहरण के लिए, नजमा हेपतुल्ला 2014 में मोदी सरकार की पहली कैबिनेट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्री रहीं, और बाद में उन्हें मणिपुर का राज्यपाल बनाया गया। ये एक संवैधानिक पद है, जो उनकी काबिलियत और पार्टी में उनके कद को दर्शाता है।

इसके अलावा, बिहार के खगड़िया से लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के सांसद महबूब अली कैसर, जो एनडीए का हिस्सा हैं, मौजूदा लोकसभा में मुस्लिम प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद हैं। ये साबित करता है कि बीजेपी और उसके सहयोगी दल मुस्लिम नेताओं को संसद तक पहुंचा रहे हैं।

राज्य स्तर पर भी बीजेपी में मुस्लिम विधायक और नेता सक्रिय हैं। जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के कई मुस्लिम कार्यकर्ता और नेता संगठन को मजबूत करने में लगे हैं। उदाहरण के लिए, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बीजेपी के मुस्लिम चेहरे हैं। उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चे के तहत कई मुस्लिम नेता सक्रिय हैं, जो ग्राउंड लेवल पर काम कर रहे हैं। ये कहना कि बीजेपी में कोई मुस्लिम विधायक नहीं है, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश है।

बीजेपी पर ये आरोप भी लगाया जाता है कि उसके पास संसद में कोई मुस्लिम सांसद नहीं है। लेकिन ये आधा सच है। 2022 में नकवी के राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद बीजेपी ने उन्हें दोबारा टिकट नहीं दिया, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पार्टी मुस्लिम नेताओं को नजरअंदाज कर रही है। बीजेपी के पास 395 सांसद हैं, और उसकी रणनीति क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर आधारित होती है। पार्टी ने मुस्लिम नेताओं को संगठन और सरकार में जिम्मेदारियां देकर उनकी भागीदारी सुनिश्चित की है। नकवी और हुसैन जैसे नेता आज भी पार्टी के लिए रणनीति बनाते हैं और अल्पसंख्यक समुदाय के बीच बीजेपी की पहुंच बढ़ाने में लगे हैं।

आरोप लगाने वाले ये भूल जाते हैं कि बीजेपी की नीति “सबका साथ, सबका विकास” पर आधारित है। अप्रैल 2025 में बीजेपी ने मुस्लिम बहुल इलाकों में “सौगात-ए-मोदी” अभियान चलाया, जिसमें ईद किट बांटी गईं। ये कदम दिखाता है कि पार्टी अल्पसंख्यक समुदाय को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। शाहनवाज हुसैन ने वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करते हुए कहा कि ये मुस्लिम हित में है, जिससे उनकी सक्रियता का पता चलता है।

तो, ये कहना कि बीजेपी अपने मुस्लिम नेताओं को तवज्जो नहीं दे रही या पार्टी में कोई मुस्लिम नेता बड़ी पोजीशन पर नहीं है, सरासर गलत है। शाहनवाज हुसैन, मुख्तार अब्बास नकवी, नजमा हेपतुल्ला और अन्य नेताओं को दी गई जिम्मेदारियां इस बात का सबूत हैं कि बीजेपी मुस्लिम नेतृत्व को न सिर्फ बढ़ावा देती है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय मंच पर सम्मान भी देती है। आरोप लगाने से पहले तथ्यों को परखना जरूरी है, वरना ये सिर्फ राजनीतिक शोर बनकर रह जाता है।

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