सुप्रीम कोर्ट ने कहा…अपराधियों में पैदा करो खौफ…वरना रेप जैसी घटनाएं रोकना होगा मुश्किल

दिल्ली। दिल्ली में बढ़ती गैंगरेप की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट अब सख्त नजर आ रहा है। हाल ही में गैंगरेप की 3 घटनाओं को सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में लेते हुए विद्रवान न्यायाधीश ने कहा कि जब तक अपराधियों के मन में मौत जैसा डर नहीं होगा तब तक ऐसे अपराध नहीं रुकेंगे। कोर्ट ने कहा कि पुलिस का केवल कागजों पर लिखना पर्याप्त नही है, जरूरी यह भी है कि अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए सख्त कार्रवाई करें। सोमवार को नाबालिंगों से गैंगरेप की घटनाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सख्त होने से हिचकिचाएं नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की इन 3 घटनाओं को लिया है संज्ञान में

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े कई मामलों का स्वतः संज्ञान में लिया था। इनमें कालकाजी के आस्था कुंज पार्क में 17 साल की किशोरी से कथित सामूहिक दुष्कर्म, स्वरूप नगर में एक नाबालिग से कथित गैंगरेप और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही बस में 16 साल की लड़की के कथित यौन उत्पीड़न का मामला शामिल था। बेंच ने कहा कि मानव अधिकार का हवाला देकर कुछ लोग सवाल उठाएंगे, लेकिन पुलिस को अपना कर्तव्य निभाना होगा। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।

खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें बच्चियां-महिलाएं

अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से कहा कि राजधानी में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि हर महिला सार्वजनिक जगहों और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते समय खुद को सुरक्षित महसूस करे। अदालत ने कहा है कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि एनसीटी दिल्ली में हर महिला सुरक्षित महसूस करे, चाहे वह रात 10 बजे पैदल चल रही हो या मेट्रो और सड़क के रास्ते सफर कर रही हो।

मुख्य बातें और निर्देश

  • अपराधियों में खौफ: अदालत ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि पुलिस का असली काम सिर्फ घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध होने से रोकना है। असामाजिक तत्वों के मन में कानून का डर होना अनिवार्य है।
  • सुरक्षा और जवाबदेही: शीर्ष अदालत ने जोर दिया कि दिल्ली-NCR में रात के समय भी हर महिला को सुरक्षित महसूस होना चाहिए, चाहे वह सड़क पर चल रही हो या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर रही हो।
  • सार्वजनिक स्थलों की निगरानी: पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर एंट्री-एग्जिट गेट पर सीसीटीवी लगाने और 24 घंटे निगरानी के लिए एक विशेष सेल (कंट्रोल रूम) बनाने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध ढाबों और शराब की दुकानों पर भी सख्त कार्रवाई की बात कही गई है जहाँ असामाजिक तत्व जमा होते हैं।
  • अगली सुनवाई: कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 के लिए तय की है।

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