TCS Appraisal Policy: भारत की प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विस यानी टीसीएस की नई पॉलिसी चर्चा में देखी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स की जानकारी के अनुसार कंपनी ने अपने मैनेजर्स से करीब 5% कर्मचारियों को सबसे निचले परफॉर्मेंस band में रखने को कह दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब आईटी सेक्टर कास्ट ऑप्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित दबाव का सामना कर रहा है। हालांकि इसका कर कर्मचारियों की सैलरी ग्रोथ प्रमोशन और फ्यूचर रोल पर देखने को मिल सकता है।

इसकी Appraisal Policy में क्या बदलाव हुआ?
TCS ने अपने इंटरनल प्रक्रिया रिव्यू में फोर्स डिस्ट्रीब्यूशन अप्रोच को अपनाया है। इसका मतलब है कि हर टीम में कुछ कर्मचारियों को को परफॉर्मेंस कैटेगरी में रखा जा सकता है। भले ही ओवरऑल टीम परफॉर्मेंस संतोषजनक देखा जाए या नहीं। कंपनी के अप्रेजल स्ट्रक्चर में आम तौर पर ए,बी,सी और डी bands होते हैं। इनमें डी band को सबसे कमजोर परफॉर्मेंस वाला category बताया जाता है। इस कैटेगरी में आने वाले कर्मचारियों को वेरिएबल पे की कमी, प्रमोशन delay और परफॉर्मेंस इंप्रूवमेंट प्लान जैसे प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार ऐसी पॉलिसीज का उपयोग अक्सर प्रोडक्टिविटी ट्रैकिंग और वर्कफोर्स ऑप्टिमाइजेशन के लिए ही किया जाता है।
ये भी पढ़े: सरकार ने Silver Import पर लगाई पाबंदी, उद्योगपति बोले आदेश ‘सर आंखों पर’
IT Sector पर बढ़ते Cost Pressure का क्या है असर
पिछले कुछ महीनो में ग्लोबल आईटी स्पेंडिंग ग्रोथ धीमी हुई है इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग में ट्रेडिशनल आईटी रोल पर भी अपना दबाव बढ़ाया है। इसी कारण से कई कंपनियां ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर जोर देती है। स्टॉक एक्सचेंज डाटा और कंपनी के डिस्क्लोजर के अनुसार टीसीएस ने हाल ही के वित्तीय वर्ष में हेड काउंट में कमी दर्ज की है। ऐसे में ऑपरेशनल पॉलिसी को कॉस्ट कंट्रोल स्ट्रेटजी के रूप में देखना सही होगा। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में परफॉर्मेंस बेस्ट इवेलुएशन सिस्टम और भी ज्यादा शक्त हो सकते हैं।
कर्मचारियों और Industry Experts reaction
सोशल मीडिया और एम्पलाई फोरम पर कर्मचारियों ने अप्रेजल ट्रांसपेरेंसी को लेकर चिंताजताई है। कुछ यूजर्स का दावा है कि उन्हें पॉजिटिव प्रोजेक्ट फीडबैक की बावजूद लोअर परफॉर्मेंस की रेटिंग देखने को मिल रही है। हालांकि कंपनी की तरफ से इस पॉलिसी को लेकर कोई बड़ा बयान नहीं मिला है लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि फोर्स रैंकिंग मॉडल कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर सकता है।
दूसरी तरफ कुछ इंडस्ट्रीज एनालिटिकल का कहना है, की बड़ी आईटी कंपनियां अब मेजरेबल प्रोडक्टिविटी और बेलेबल एफिशिएंसी पर अपना ज्यादा ध्यान दे रही है। इससे हाई स्किल एम्पलाइज की डिमांड ज्यादा बढ़ सकती है।
ये भी पढ़े: सेमीकंडक्टर चिप के लिए Tata Electronics और ASML के बीच हुई बड़ी डील..
Tcs निवेशकों और कर्मचारियों के लिए क्या संकेत?
बाजार की विशेषज्ञों की जानकारी के अनुसार इस तरह की अप्रेजल पॉलिसी शॉर्ट टर्म में ऑपरेशनल मार्जिन को सुधारने में मदद कर सकती हैं। हालांकि लंबे समय में एंप्लॉई रिटेंशन और वर्कप्लेस मोरल कंपनी के लिए चुनौती बन सकता है। आईटी सेक्टर में भर्ती कंपटीशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एडॉप्शन के बीच कंपनी अब लीनवर्क मॉडल की तरफ बढ़ती जा रही है ऐसे में कर्मचारियों के लिए लगातार अब अप्सकिलिंग और टेक्नोलॉजी को अडॉप्ट करना पहले से भी ज्यादा जरूरी हो गया है। हालांकि यह रिपोर्ट निवेश की सलाह नहीं है निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल सलाहकार से जरूर समझे।




