Takur Ranmat Singh College : रीवा। टी.आर.एस. कॉलेज में सीपीआर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन – युवक रेड क्रॉस इकाई एवं श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में हुआ कार्यक्रम ,शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा की युवक रेड क्रॉस इकाई तथा श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा के नेल्स स्किल सेंटर के संयुक्त तत्वाधान में कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में महाविद्यालय के फैकल्टी सदस्यों और छात्रों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक तकनीक सीपीआर के महत्व और उसकी विधियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
आपातकाल स्थिति में जीवन लौटा सकती है पीसीआर थैरेपी
प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि, “सीपीआर एक ऐसी तकनीक है जो अचानक हृदय रुक जाने या सांस बंद हो जाने की स्थिति में व्यक्ति को जीवनदान दे सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ-साथ शिक्षित युवाओं को भी इसका ज्ञान होना चाहिए ताकि आपात स्थिति में वे किसी की जान बचाने में सक्षम बन सकें। यह प्रशिक्षण न केवल चिकित्सा दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी सशक्त करता है।”
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. अवतार सिंह, नोडल अधिकारी, नेल्स स्किल सेंटर, डॉ. सुभाष अग्रवाल, डॉ. वर्षा शुक्ला, डॉ. आशुतोष, डॉ. शैफाली, डॉ. अमानत, श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा उपस्थित रहे। डॉ. अवतार सिंह ने सीपीआर की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया और प्रतिभागियों को इसके वैज्ञानिक पहलुओं से अवगत कराया। डॉ. सुभाष अग्रवाल ने बताया कि सीपीआर का सही ज्ञान हृदयाघात की स्थिति में तत्काल सहायता का सबसे प्रभावी माध्यम है। हृदयगति रुक जाने की स्थिति में यदि प्रारंभिक 4-5 मिनट के भीतर सीपीआर दिया जाए तो व्यक्ति के जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संयोजन प्रोफेसर अखिलेश शुक्ल द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान जीवनशैली में तनाव, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता के कारण हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में सीपीआर जैसी तकनीकें न केवल चिकित्सकों के लिए, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए आवश्यक बन गई हैं। इस प्रकार के प्रशिक्षण से विद्यार्थी सेवा और संवेदना दोनों का महत्व समझते हैं।
इनकी रही विशेष उपस्थिति
इस अवसर पर डॉ. अजयशंकर पाण्डेय, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव, डॉ. शाहेदा सिद्दीकी, डॉ. फरजाना बानो, डॉ. अतुल शुक्ला तथा विभिन्न विभागों के प्रभारी युवक रेड क्रॉस शिक्षक डॉ. सुधाकर द्विवेदी, डॉ. निशा सिंह, डॉ. प्रियंका पाण्डेय, डॉ. आनन्द मोहन द्विवेदी, डॉ. आशुतोष कुमार सिंह डॉ. गंुजन सिंह, डॉ. प्रियंका तिवारी, डॉ. गिरिजा शंकर पाण्डेय, प्रो. अर्पणा सिंह, डॉ. प्रवीण विश्वकर्मा, डॉ. दिलीप तिवारी, डॉ. अरूणेश शुक्ला, डॉ. अनुज पाण्डेय, प्रो. प्रियंका पाण्डेय अंग्रेजी, डॉ. अखिलेश शुक्ला बी.बी.ए., डॉ. विवेक पाण्डेय द्वितीय, सहित कई संकाय सदस्य उपस्थित रहे। प्रशिक्षण सत्र में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों को सीपीआर की तकनीक के साथ-साथ बेसिक लाइफ सपोर्ट प्रणाली, कृत्रिम श्वसन, और हृदय संकुचन की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। छात्रों ने चिकित्सा विशेषज्ञों के निर्देशन में डमी पर सीपीआर का अभ्यास किया और आपातकालीन परिस्थितियों में प्राथमिक उपचार देने की क्षमता विकसित की। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने अनेक जिज्ञासाएँ भी व्यक्त कीं जिनका समाधान विशेषज्ञों ने सरल भाषा में किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हृदयाघात की बढ़ती घटनाओं की रोकथाम और जन-जागरूकता की दिशा में एक सराहनीय, प्रेरणादायी एवं कारगर पहल सिद्ध हुआ। आयोजन की जानकारी डॉ. अखिेलश शुक्ल , प्रभारी प्राध्यापक युवक रेडक्रास शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय रीवा (म.प्र.)ने दी।
