Supreme Court NCERT Corruption In Judiciary: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने NCERT (NCERT) की 8वीं कक्षा की सोशल साइंस किताब में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ (Corruption In Judiciary) वाले चैप्टर पर सख्त कार्रवाई की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत (Chief Justice Suryakant) की अध्यक्षता वाली बेंच ने गुरुवार को किताब छापने, बांटने और डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने पर पूर्ण रोक लगा दी।
कोर्ट ने आदेश दिया कि पहले से भेजी गई सभी प्रिंटेड किताबें तुरंत वापस ली जाएं और डिजिटल कॉपियां सभी प्लेटफॉर्म से हटा दी जाएं। NCERT डायरेक्टर और केंद्रीय शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। कोर्ट ने सिलेबस से जुड़ी बैठकों की मिनट्स, विवादित चैप्टर लिखने वाले लेखकों के नाम और उनकी योग्यता भी मांगी है।
CJI ने कहा, “यह न्यायपालिका को बदनाम करने की गहरी और सोची-समझी साजिश लगती है। जिम्मेदार लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई होगी। जांच गहराई से चलेगी और केस बंद नहीं होगा। NCERT पर अवमानना की कार्रवाई भी संभव है।”
सुप्रीम कोर्ट के 4 प्रमुख निर्देश
- केंद्र और राज्यों के शिक्षा विभाग तुरंत किताबें (प्रिंटेड या डिजिटल) लोगों की पहुंच से हटाएं।
- किताब का कोई भी वर्जन बांटना कोर्ट आदेश का उल्लंघन माना जाएगा।
- सभी राज्यों के शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव 2 हफ्ते में कार्रवाई रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपें।
- जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कोर्ट एक कमेटी बनाएगा, जो पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारों की पहचान करेगी।
कांग्रेस का हमला – बदलाव RSS से प्रेरित
कांग्रेस ने इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी। जयराम रमेश ने कहा कि पिछले 10 साल में NCERT किताबों में किए गए बदलाव RSS से प्रेरित हैं। यह गलत और खतरनाक है। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी जायज है और पूरे प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।
विवादित चैप्टर का कंटेंट
NCERT ने 23 फरवरी को जारी नई किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ में ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ टॉपिक के अंदर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का हिस्सा जोड़ा। किताब में लिखा है: “Justice delayed is justice denied” यानी इंसाफ में देरी नाइंसाफी है। इसमें सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार और डिस्ट्रिक्ट-सबऑर्डिनेट कोर्ट्स में 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस का आंकड़ा दिया गया है।
यह किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी। बुधवार को CJI की फटकार के बाद NCERT ने माफी मांग ली थी। सरकारी सूत्रों ने कहा कि आंकड़े संसदीय अभिलेखों और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड से लिए गए थे, लेकिन फैक्ट्स के क्रॉस वेरिफिकेशन के लिए केंद्र से परामर्श नहीं किया गया। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
