भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। आज के स्टॉक मार्केट अपडेट के अनुसार, सुबह के सत्र में जबरदस्त बढ़त के साथ खुलने के बाद बाजार ने अपनी पूरी बढ़त गंवा दी। सेंसेक्स अपने दिन के उच्च स्तर से 600 अंक नीचे फिसल गया, जिससे निवेशकों के बीच हलचल तेज हो गई है।
कारोबारी सप्ताह के चौथे दिन यानी 22 जनवरी को बाजार की शुरुआत सकारात्मक हुई थी। वैश्विक बाजारों से मिले अच्छे संकेतों के बाद निफ्टी ने 25,430 का स्तर छुआ, वहीं सेंसेक्स 82,750 के पार निकल गया। लेकिन यह तेजी ज्यादा देर नहीं टिकी और दोपहर होते-होते बाजार में ऊपरी स्तरों से भारी बिकवाली शुरू हो गई।
मुनाफ़ावसूली ने बिगाड़ा बाजार का मूड
बाजार के जानकारों का मानना है कि पिछले तीन दिनों की लगातार गिरावट के बाद आज सुबह जैसे ही रिकवरी आई, बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। विशेष रूप से बैंकिंग और आईटी शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। ‘बैंक निफ्टी’ अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1% नीचे गिरकर कारोबार करने लगा, जिसने पूरे मार्केट सेंटीमेंट को कमजोर कर दिया।
स्टॉक मार्केट अपडेट: गिरावट के पीछे 3 प्रमुख कारण
बाजार में आई इस अचानक गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं। पहला, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर टैरिफ संबंधी धमकियों को वापस लेना सुबह के लिए सकारात्मक था, लेकिन निवेशकों को अब भी व्यापार नीतियों में अनिश्चितता नजर आ रही है। दूसरा बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार जारी बिकवाली है, जो रुकने का नाम नहीं ले रही।
तीसरा कारण रुपये की कमजोरी है। रुपया फिलहाल 91.59 के स्तर के आसपास बना हुआ है। कल ही भारतीय मुद्रा ने डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर को छुआ था। जब तक रुपया स्थिर नहीं होता, तब तक विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी मार्केट में बड़े निवेश से बचते नजर आएंगे।
तकनीकी स्तर और विशेषज्ञों की राय
चॉइस ब्रोकिंग के विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 25,250 से 25,300 का जोन अब एक बड़ी बाधा बन गया है। जब तक सूचकांक इस स्तर के ऊपर मजबूती से बंद नहीं होता, तब तक बिकवाली का दबाव बना रह सकता है। नीचे की तरफ 25,000 का स्तर एक मनोवैज्ञानिक और तकनीकी सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है। अगर यह स्तर टूटता है, तो बाजार और नीचे जा सकता है।
बैंकिंग शेयरों पर बनी हुई है नजर
बैंक निफ्टी का 60,000 के स्तर को पार न कर पाना चिंता का विषय बना हुआ है। बैंकिंग सेक्टर के दिग्गज शेयरों में कमजोरी के कारण निवेशकों का भरोसा थोड़ा डगमगाया है। हालांकि, बाजार में अभी भी एडवांस-डिक्लाइन रेशियो सकारात्मक है, जिसका मतलब है कि मिडकैप और स्मॉलकैप में चुनिंदा खरीदारी जारी है।

2026 की शुरुआत से ही बाजार में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) थीम वाले शेयरों का दबदबा रहा है। लेकिन भारतीय संदर्भ में कमजोर कॉर्पोरेट अर्निंग और ऊंचे वैल्युएशन के कारण बाजार वैश्विक दौड़ में थोड़ा पीछे नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
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