रीवा। शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा में आज 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा एवं मौन जुलूस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ठाकुर रणमत सिंह जी की प्रतिमा के समक्ष दोपहर 12.30 बजे सम्पन्न हुआ, जिसमें महाविद्यालय के सभी विभागों के प्राध्यापकों, स्टाफ सदस्यों एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
विभाजन भारत के इतिहास का काला अध्याय
कार्यक्रम की शुरुआत में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी ने शहीदों की महान कुर्बानी और अंग्रेजों की गलत नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि विभाजन भारत के इतिहास का सबसे दर्दनाक और काला अध्याय है, जिसमें लाखों निर्दाेष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति ने न केवल देश को दो टुकड़ों में बांट दिया, बल्कि साम्प्रदायिक सद्भाव को भी गहरा आघात पहुँचाया। डॉ. अवस्थी ने शहीदों को नमन करते हुए युवा पीढ़ी से अपील की कि वे इस इतिहास को कभी न भूलें और देश की एकता व अखंडता के लिए सदैव तत्पर रहें।
विभाजन से उजड़ गए परिवार
सहायक प्राध्यापक प्रशांत चौरसिया ने विभाजन की वेदना को व्यक्त करते हुए कहा कि विभाजन ने न केवल भौगोलिक सीमाएं बदलीं, बल्कि लाखों परिवारों को उजाड़ दिया और अनगिनत लोगों को बेघर बना दिया। उस काल में हुए नरसंहार, महिलाओं पर हुए अत्याचार और विस्थापन की पीड़ा आज भी देश के दिल में गहरी चोट छोड़ गई है। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी को याद रखना हमारा नैतिक कर्तव्य है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और हम सब मिलकर एक मजबूत व एकजुट भारत का निर्माण करें।
कॉलेज परिसर ने निकाला गया मौन जुलूश
श्रद्धांजलि सभा में सभी उपस्थित जनों ने शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद मौन जुलूस निकाला गया, जिसमें छात्रों ने पूर्ण मौन रखकर विभाजन की पीड़ा को स्मरण किया। जुलूस महाविद्यालय में स्थापित ठाकुर रणमत सिंह जी की प्रतिमा से आरम्भ होकर कॉलेज चौराहा से होते हुए रीवा शहर में निकाला गया। पूरे मार्ग में गहरी संवेदना का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम में डॉ. आर. एन. तिवारी, डॉ. पूनम मिश्रा, समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश शुक्ल, डॉ. गायत्री मिश्रा, डॉ. उर्मिला वर्मा तथा एनएसएस के जिला संगठक डॉ. नागेश त्रिपाठी समेत विभिन्न विषयों के प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, स्टाफ सदस्य तथा छात्र-छात्राएं भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




