Site iconSite icon SHABD SANCHI

Sickle Cell Disease में क्यों बढ़ जाता है Pregnancy Risk? जानिए

Why does pregnancy risk increase with Sickle Cell Disease? Learn about the necessary precautions.Why does pregnancy risk increase with Sickle Cell Disease? Learn about the necessary precautions.

Why does pregnancy risk increase with Sickle Cell Disease? Learn about the necessary precautions.

Sickle Cell Disease: गर्भावस्था हर महिला के लिए एक खास समय होता है लेकिन अगर महिला को सिकल सेल डिजीज हो गई है तो यह स्थिति अधिक सावधानी की मांग करती है। डॉक्टर के द्वारा दी जाने वाली जानकारी के अनुसार सिकल सेल डिजीज से पीड़ित महिलाओं की प्रेगनेंसी हाई रिस्क में मानी जाती है क्योंकि इस बीमारी का असर मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों पैर पड़ता है। हालांकि सही देखभाल और नियमित तरीके से जांच करने से सुरक्षित तरीके से गर्भावस्था संभवहै।

क्या है Sickle Cell Disease और Risk Pregnancy का संबंध?

Sickle Cell Disease एक तरह का अनुवांशिक ब्लू विकार होता है जिसमें लाल रक्त कोशिका सामान्य गोल आकार की बजाय हंसिए जैसी बन जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होने लगती है और रक्त वाहिकाओं में रुकावट आने का खतरा भी हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर पर ज्यादा दबाव पड़ता है जिससे जटिलताओं की संभावना भी बढ़ने लगती है यही कारण है कि ऐसी गर्भावस्था को हाई रिस्क प्रेगनेंसी भी कहा जाता है।

ये भी पढ़े: Pregnancy से पहले क्यों दी जा रही हैं GLP-1 Weight Loss दवाएं? जानिए

मां के लिए कौन-कौन से खतरे हैं?

इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं में गंभीर एनीमिया बार-बार दर्द के दौरे संक्रमण रक्त के थक्के बना और हाई ब्लड प्रेशर जैसे समस्याएं देखने को मिलती है। कुछ मामलों में फेफड़ों से जुड़ी गंभीर रिस्क भी देखने को मिलता है इसलिए नियमित मेडिकल निगरानी जरूरी है।

बच्चे के स्वास्थ्य पर क्या असर है?

Sickle Cell Disease का असर केवल माता की सीमित नहीं रहता इस स्थिति के समय पहले प्रसव जन्म के समय कम वजन गर्भ में बच्चों की धीमी वृद्धि और कुछ मामलों में गर्भस्थ शिशु को गंभीर रिश्क का भी सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि गर्भावस्था के दौरान बच्चे के विकास की नियमित जांच की जाती है।

High-Risk Pregnancy में किन बातों का ध्यान?

डॉक्टर के द्वारा दी जाने वाली जानकारी के अनुसार गर्भावस्था की शुरुआत से ही स्त्री रोग विशेषज्ञ और रक्त रोग विशेषज्ञ की निगरानी जरूरी होती है। नियमित ब्लड टेस्ट ब्लड प्रेशर की जांच और अल्ट्रासाउंड करते रहना चाहिए इसके अलावा शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए क्योंकि डिहाइड्रेशन से सिकल सेल्फ क्राइसिस का खतरा बढ़ जाता है।

ये भी पढ़े: Women’s Wellness And Cervical Cancer : महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा सर्वाइकल कैंसर का खतरा

इसमें Genetic Counseling क्यों है जरूरी?

अगर माता-पिता दोनों में सिकल सेल जीन मौजूद है तो बच्चे में बीमारी आने का रिस्क ज्यादा होता है। ऐसे में जेनेटिक काउंसलिंग से परिवार को बीमारी से जुड़े रिस्क और उपलब्ध ऑप्शन की जानकारी दी जाती है। कुल मिलाकर, Sickle Cell Disease के साथ प्रेगनेंसी चुनौती पूर्ण होती है इसलिए सही इलाज और संतुलित जीवन शैली के साथ निर्मित मेडिकल देखभाल के जरिए मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।

Exit mobile version