Shiv Sena UBT Crisis : उद्धव की शिवसेना में फिर बगावत! दिल्ली बैठक से गायब रहे 6 सांसद, लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा अलग होने का पत्र

Uddhav Thackeray emergency meeting

Shiv Sena UBT Crisis : महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से हलचल मच गई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने गुरुवार को दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक से दूरी बना ली। इससे पार्टी में टूट की बातें तेज हो गई हैं।

क्यों हो रही उद्धव की शिवसेना में बगावत?

उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी में इस बगावत के पीछे सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है कि कुछ सांसदों को डर है कि शिवसेना (UBT) भविष्य में कांग्रेस के साथ मिल सकती है। बागी सांसदों का आरोप है कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक रही है और अपनी पहचान को खतरे में डाल रही है। यह महाराष्ट्र में पिछले चार साल में तीसरी बड़ी राजनीतिक टूट है। 2022 में शिवसेना में और 2023 में शरद पवार की NCP में भी फूट देखने को मिली थी।

उद्धव ठाकरे की बैठक में पहुंचे केवल तीन सांसद

गुरुवार को शिवसेना (UBT) ने दिल्ली में सांसदों की बैठक बुलाई थी। इसमें पार्टी का समर्थन अब भी उद्धव ठाकरे के साथ है या नहीं, यह तय करना था। लेकिन 9 में से 6 सांसद बैठक में नहीं पहुंचे। सिर्फ अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही मौजूद रहे। जानकारों का कहना है कि अगर किसी खेमे को अलग पहचान बनानी है, तो उसे कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन चाहिए। चूंकि 6 सांसदों ने एक साथ अलग होने का फैसला किया है, इसलिए इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांग्रेस के साथ समर्थन से नाराज हैं बागी सांसद

बागी सांसदों का आरोप है कि शिवसेना (UBT) धीरे-धीरे कांग्रेस के साथ जाने की तैयारी कर रही है। सांसद नरेश म्हस्के ने आरोप लगाया कि कई सांसदों ने उद्धव ठाकरे से मिलना चाहा, लेकिन उन्हें सही जवाब नहीं मिला। बागी नेताओं ने संजय राउत के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर बनी पार्टियों के फिर से साथ आने की बात कही थी। उनका कहना है कि इसी वजह से उन्हें लगा कि शिवसेना (UBT) भी उसी दिशा में जा रही है।
बागी सांसदों ने यह भी कहा कि उन्हें डर था कि शिवसेना (UBT) कांग्रेस के साथ मिल जाएगी। उनका आरोप है कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक रही है। सांसदों ने यह भी कहा कि शिवसेना की स्थापना किसी भी हाल में कांग्रेस में शामिल होने के लिए नहीं हुई थी। इन सब बातों की पूरी योजना बेहद गोपनीय तरीके से हुई। 16 जून की रात कई सांसद दिल्ली पहुंचे और मीटिंग की। 17 जून को सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर अलग होने का पत्र भी सौंप दिया।

संजय राउत ने बागियों को गद्दार कहा

संजय राउत ने इन बागी सांसदों पर हमला बोला है। उन्होंने उन्हें ‘गद्दार’ और ‘बेईमान’ कहा। संजय राउत का कहना है कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतने वाले सांसद अगर पार्टी का व्हिप तोड़ेंगे, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनका दावा है कि इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई शुरू की जा रही है।

फणनवीस सरकार ने उद्धव के 6 बागियों की बढ़ाई सुरक्षा

वहीं, महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ते तनाव को देखते हुए इन छह सांसदों की सुरक्षा भी बढ़ा दी है। इंटेलिजेंस विभाग ने उन्हें Y+ कैटेगरी की सुरक्षा दी है। इसमें संजय दीना पाटिल, नागेश पाटिल अस्टिकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख और संजय जाधव शामिल हैं। सरकार का कहना है कि खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। राउत ने इस पर भी हमला किया और कहा कि यदि सांसदों को भरोसा है तो बिना सुरक्षा के जनता के बीच जाएं।

बता दें कि अब सबकी नजरें 20 जून पर हैं, जब शिवसेना का स्थापना दिवस है। हो सकता है कि इन सांसदों का अगला कदम भी इसी दिन सामने आए। अगर ये सांसद शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं, तो महाराष्ट्र में फिर से बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है। यह तीसरी बड़ी टूट होगी महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में।

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