Shadowfax IPO Day 1 पर शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों की नजर टिकी हुई है। लॉजिस्टिक्स सेक्टर की इस कंपनी के आईपीओ को लेकर पहले दिन से ही उत्साह सीमित देखा जा रहा है। सब्सक्रिप्शन की शुरुआती आंकड़े और ग्रे मार्केट प्रीमियम ने साफ तौर पर बताया है कि निवेश करने वाले लोगों के द्वारा फिलहाल संतुलित रुख अपनाया जा रहा है।

IPO Day 1 के इश्यू से जुड़ी जानकारी
Shadowfax Technologies का IPO 20 जनवरी को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला कंपनी के शेयर का प्राइस बैंड 118 रुपए से लेकर 124 रुपए प्रति शेयर पर तय किया गया है। यह आईपीओ फ्रेश इशू और ऑफर फॉर सेल का मिश्रण है, जिसके जरिए कंपनी करीब 1900 करोड रुपए से ज्यादा की योजना बना रही है रिटन निवेश करने वाले लोगों के लिए न्यूनतम एक लॉट में 120 शेयर रखे गए हैं।
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Day 1 Subscription IPO पहले दिन का हाल
पहले दिन के कारोबार में शैडोफैक्स आईपीओ सब्सक्रिप्शन के आंकड़े से मत देखे शुरुआती घंटे में रिटेल निवेश करने वाले लोगों की भागीदारी जरूर देखी लेकिन कल सब्सक्रिप्शन एक गुना से काफी नीचे तक रहा। नॉन इंस्टीट्यूशन और QUIB कैटेगरी में भी पहले दिन कोई खास तेजी नहीं दिखी है। आमतौर पर कई आईपीओ में आखिरी दिनों में सब्सक्रिप्शन रफ्तार देखी जाती है, इसलिए पहले दिन के आंकड़ों को अंतिम संकेत नहीं माना जाता है।
Shadowfax IPO Day 1 GMP क्या बता रहा है
ग्रे मार्केट में Shadowfax IPO Day 1 GMP मामूली प्रीमियम पर कारोबार करता दिखा, GMP का सीमित दायरा यह संकेत देता है कि लिस्टिंग गेन को लेकर बाजार में बहुत ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। हालांकि, GMP एक अनऑफिशियल संकेतक ही होता है और इसमें रोजाना बदलाव होना भी संभव है।
कंपनी का बिजनेस मॉडल और सेक्टर की स्थिति
Shadowfax ई-कॉमर्स और हाइपरलोकल डिलीवरी लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कंपनी होती है। तेजी से बढ़ते ऑनलाइन रिटेल और क्विक कॉमर्स से इस सेक्टर में लंबी अवधि की संभावनाएं भी जरूर दिखती हैं। कंपनी ने हाल ही के वर्षों में अपने नेटवर्क और ऑपरेशनल स्केल को ज्यादा बढ़ाया है, लेकिन मुनाफे और मार्जिन को लेकर निवेश करने वाले लोग सतर्क नजर आ रहे हैं।
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निवेशकों के लिए क्या है संकेत
IPO Day 1 के आंकड़े यह बताते हैं कि निवेशक जल्दबाजी के बजाय तथ्यों को भी परख रहे हैं। सीमित सब्सक्रिप्शन और हल्का GMP यह इशारा करता है कि लिस्टिंग गेन को लेकर उम्मीदें संतुलित होती हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रिटेल निवेशक को आगे के सब्सक्रिप्शन ट्रेंड, कंपनी की वित्तीय स्थिति और सेक्टर ग्रोथ को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।
