घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। Sensex करीब 400 अंकों तक नीचे आ गया, जबकि निफ्टी 25,850 के नीचे का कारोबार करता दिखा है। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से आईटी शेयरों में तेज बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण ही दर्ज की गई है।

IT सेक्टर की कमजोरी से Sensex पर दबाव
आज की गिरावट में आईटी सेक्टर सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स में भारी कमजोरी के चलते Sensex पर सीधा दबाव पड़ता दिखा है। मार्केट के रिसचर्स का मानना है कि वैश्विक मांग को लेकर अनिश्चितता और अमेरिकी बाजारों से मिले संकेतों ने निवेश करने वाले लोग का भरोसा कमजोर कर दिया है। आईटी कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से ही आता है, इसलिए बाहरी संकेतों का सीधा असर इस सेक्टर पर ही पड़ रहा है।
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अमेरिकी संकेत और ब्याज दरों की चिंता
बीते कुछ दिनों में अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बाद या आशंका बढ़ती दिखाई दी है कि फेडरल रिजर्व जल्द ही ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। इससे वैश्विक बाजारों में सतर्कता बढ़ती दिखाई दी है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने भी बाजार के मूड को काफी ज्यादा प्रभावित किया है। निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते हुए नजर आ रहे हैं, जिसका असर Sensex और निफ्टी दोनों पर देखा जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी चिंता का कारण बनी हुई है। तेल महंगा होने से भारत जैसे आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। बाजार का कहना है कि इन कारकों ने मिलकर निवेशकों की बड़ी धारणा को कमजोर किया है।
अन्य सेक्टरों में भी दबाव, बाजार चौतरफा कमजोर
आईटी के अलावा रियल्टी और मीडिया सेक्टर में भी गिरावट देखी गई है। हालांकि बैंकिंग और कुछ FMCG शेयरों ने सीमित सहारा देने की कोशिश भी की, लेकिन व्यापक बाजार में गिरावट का रुख हावी होता दिख रहा है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली है, जिससे बाजार की चौड़ाई नेगेटिव रही।
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आगे की प्लानिंग क्या हो?
बाजार के जानकारों का ऐसा मानना है कि निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को जल्दबाजी में किसी तरह का फैसला लेने के बजाय कंपनियों की बुनियादी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। यदि वैश्विक संकेतों में सुधार आता है तो Sensex और निफ्टी में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन फिलहाल बाजार अपने सतर्क रुख में ही नजर आ रहा है।
