chikungunya research: चिकनगुनिया जैसी बीमारी की लाज को लेकर वैज्ञानिक लगातार नए-नए ऑप्शन तलाश रहे हैं इसी कड़ी में आईआईटी रुड़की के रिसर्च करने वाले लोगों ने एक अध्ययन किया है जिसमें दावा किया गया है कि Cow Urine Extract यानी गोमूत्र अर्क नाम रिसर्च केंद्र में चिकनगुनिया वायरस का वायरल लोड 90% से अधिक कम कर दिया है। डॉक्टर का कहना है कि इस परिणाम को अभी शुरुआती खोज के रूप में ही देखना चाहिए।

IIT Roorkee के अध्ययन में क्या सामने आया?
आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने चिकनगुनिया वायरस पर गोमूत्र अर्क से प्रभाव का अध्ययन किया जिसकी रिसर्च के दौरान पाया गया की प्रयोगशाला में संक्रमित कोशिका पर इसका उपयोग करने पर वायरस की मात्रा में बहुत कमी देखने को मिली। रिसर्च की जानकारी के अनुसार वायरल लोड में 90% से अधिक की गिरावट देखने कोमिली। रिसर्च करने वाले लोगों का मानना है कि गोमूत्र में मौजूद कुछ जैविक योग वायरस की वृद्धि को रोकने में मुख्य भूमिका निभा रहेहैं।
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chikungunya Viral Load कम होने का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि शरीर या कोशिकाओं में मौजूद वायरस की मात्रा कम हो रही है जब किसी उपचार से वायरल लोड घटता है तो इसका संकेत मिलता है कि वायरस की संख्या कम हो रही है। हालांकि केवल वायरल लोड कम होना या साबित नहीं करता है कि वह उपचार पूरी तरह से प्रभावकरी है इसके लिए अन्य वैज्ञानिक टेस्ट की भी जरूरत होती है।
इसको किन तत्वों को माना गया असरदार?
रिसर्च में अध्ययन के दौरान कुछ ऐसे रासायनिक यौगिक की पहचान की गई है जो वायरस की प्रतिकृति यानी रिप्लिकेशन को प्रभावित करने वाली है। इसमें बेंजोइक एसिड, हेपरिक एसिड, फोलिक एसिड जैसे तत्व शामिल मिलेंगे। वैज्ञानिक के अनुसार आगे की रिसर्च में इन योग की भूमिका को भी और विस्तार से समझा जाएगा।
अभी क्यों जरूरी हैं इसके आगे के परीक्षण?
यह दिन केवल प्रयोगशाला लेवल पर ही किया गया है अभी तक इंसानों पर या फिर किसी तरह का क्लिनिकल ट्रायल इस पर नहीं किया गयाहै। चिकित्सा विज्ञान में किसी भी नए उपचार को स्वीकारने से पहले उसकी सुरक्षा प्रभावशीलता और दुष्प्रभाव की जांच की जाती है। इसलिए मौजूदा परिणाम को अंतिम निष्कर्ष नहीं मान सकते।
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इसपर विशेषज्ञों की क्या राय है?
इस रिसर्च को दिलचस्प और संभावनाओं से भरा हुआ बताया जा रहा है लेकिन साथ ही सावधानी बरतने की सलाह भी दी जा रही है जब तक स्वतंत्र रिसर्च इन परिणामों की पुष्टि नहीं करते तब तक मानव परीक्षण पर या सफल नहीं होते हैं। इसलिए हम ये नहीं कह सकते कि गोमूत्र से chikungunya की प्रमाणित दवा बन जाएगी।




