भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने 5 अगस्त को RBI Repo Rate तो 5.25 प्रतिशत पर परिवर्तित रखने का फैसला लिया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक में अपनी न्यूट्रल स्टैंड्स भी बरकरार रखी है यह निर्णय महंगाई की मौजूदा लेवल मजबूत आर्थिक वृद्धि और वैश्विक अनिश्चित को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है। इसका सीधा असर होम लोन ऑटो लोन और बैंकिंग सेक्टर के साथ-साथ वित्तीय बाजारों पर देखने को मिलेगा।
RBI Repo Rate में आखिर बदलाव क्यों नहीं किया गया?
आरबीआई के अनुसार खुदरा महंगाई फिलहाल निर्धारित दायरे में बनी हुई है लेकिन वैश्विक लेवल पर कच्चे तेल की कीमत और भू राजनीतिक तनाव जैसे रिस्क अभी भी मौजूद दिख रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक में ब्याज दरों में किसी भी तरह के बदलाव करने के बजाय मौजूदा स्थिति को बनाए रखना उचित समझा है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार या फैसला आर्थिक विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच एक संतुलन की प्लानिंग को दिखाता है।
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Neutral Stance का क्या मतलब होता है?
आरबीआई के द्वारा न्यूट्रल स्टैंड्स बनाए रखने का मतलब होता है, कि भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई पूर्व निर्धारित दिशा तय नहीं की गई है। अगर आने वाले महीने में महंगाई की दर बढ़ जाती है तो रेपो रेट में बढ़ोतरी देखी जाएगी। वहीं आर्थिक गतिविधियों में कमजोरी और महंगाई के नियंत्रण में रहने की स्थिति में दर में कटौती की संभावना भी बनी रहेगी। जिसका मतलब है कि आगे के सभी फैसले आर्थिक आंकड़े पर ही आधारित होने वाले हैं।
बैंकिंग सेक्टर और इसके निवेशकों पर क्या असर होगा?
RBI Repo Rate स्थिर रहने से बैंकों की उधर हुई लागत में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं देखने को मिलेगा इससे होम लोन और गाड़ियों पर लेने वाले लोन की ईएमआई में तत्काल बदलाव की संभावनाएं कम है। फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज में भी निकट भविष्य में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं दिख रही है शेयर बाजार के लिए या फैसला पहले से ही अनुमानित है इसलिए बाजार की रिएक्शन अभी सीमित दिख रही है।
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अर्थव्यवस्था के लिए क्या है आगे का संकेत
आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत घरेलू मांग निवेश करने की गतिविधि और बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता को एक पॉजिटिव संकेत बताया है। निवेश करने वाले लोगों का मानना है कि अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और वैश्विक परिस्थितियों स्थिर हो जाती हैं तो आने वाली मौद्रिक नीति इसकी रोगी और मौद्रिक नीति के बैठकों में डाटा के आधार पर निर्णय भी लिए जाएंगे हालांकि तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटना पर केंद्रीय बैंक लगातार बनाए हुए है।
ये निर्णय फिलहाल अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। हालांकि भविष्य की मौद्रिक नीति पूरी तरह से महंगाई वैश्विक आर्थिक हालात और घरेलू विकास दर जैसे संकेत पर ही निर्भर करते हैं। यह आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य से है इसको किसी भी प्रकार की निवेश की सलाह नहीं समझे।

