RBI Governor की चेतावनी, वित्तीय मजबूती के बाबजूद नया संकट..

RBI Governor's warning; focus also on a robust financial system.

भारत की फाइनेंसियल व्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रही है,लेकिन मौजूदा मजबूती को भविष्य के रिस्क से पूरी तरह से सुरक्षा की गारंटी नहीं मानना चाहिए। RBI Governor संजय मल्होत्रा ने फाइनेंशियल स्थिरता को बनाए रखने के लिए लगातार सतर्क रहने पर जोर दिया है।

अभी वित्तीय व्यवस्था में तत्काल कोई तनाव नहीं

RBI Governor संजय मल्होत्रा ने 3 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले पांच के कौटिल्य इकोनामिक कॉन्क्लेव में फाइनेंशियल स्कीम के बारे में बात की है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक बनी रहने वाली स्थिरता कभी-कभी ज्यादा रिस्क लेने और कर्ज बढ़ाने के प्रवृत्ति को बढ़ा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल फाइनेंशियल क्षेत्र में किसी तत्काल तनाव के संकेत नहीं दिख रहे हैं। उनका संदेश किसी तत्काल वित्तीय संकट की घोषणा की तरफ नहीं है बल्कि भविष्य में बनने वाले कमजोरी कुछ समय रहते पहचान और उनसे निपटने की तैयारी पर है।

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बैंकिंग व्यवस्था की स्थिति है मजबूत

आरबीआई की जून 2026 की फाइनेंसियल रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 कि बैंकों का शकल खराब कर्ज अनुपात 1.8% था। सामान्य स्थिति वाले अनुमान में, मार्च 2028 तक इसके 1.9% रहने की संभावनाएं बताई गई थी। वहीं गंभीर दवा वाली स्थिति में यह अनुपात 3.8 से 4.1% तक पहुंच सकताहै। यह बताया कि है जानकारी में की भारतीय बैंकों की पूंजी और फाइनेंशियल स्थिति ने बाहरी चुनौती के बीच मजबूती दिखाइए इसलिए मौजूदा आंकड़े किसी तत्काल बैंकिंग संकट की तरफ संकेत नहीं करते हैं।

अगला वित्तीय संकट बैंक से ही आए, जरूरी नहीं

RBI Governor ने फाइनेंशियल रिस्क के बदलते स्वरूप पर खास ध्यान दिया है उनके अनुसार भविष्य का बड़ा झटका किसी बैंक से शुरू होना जरूरी नहीं होता है भू राजनीतिक घटनाओं साइबर क्राइम या तकनीकी दिक्कत से भी फाइनेंशियल व्यवस्था प्रभावित होती है।

वित्तीय जोखिमों के बदलते स्वरूप पर खास ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक भविष्य का बड़ा झटका किसी बैंक से शुरू होना जरूरी नहीं है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम, साइबर हमला या तकनीकी गड़बड़ी भी वित्तीय व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने वैश्विक स्तर पर ऊंचे कर्ज, कुछ परिसंपत्तियों के ऊंचे मूल्यांकन, बैंकों के बाहर बढ़ते कर्ज और निजी ऋण से जुड़े जोखिमों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े साइबर जोखिमों को भी महत्वपूर्ण चुनौती बताया।

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सिर्फ बैंकों की निगरानी पर्याप्त नहीं

मल्होत्रा ने वित्तीय स्थिरता के लिए पूरे वित्तीय तंत्र को मजबूत करने की जरूरत बताई। इसमें बैंक के अलावा गैर-बैंक वित्तीय संस्थान, वित्तीय बाजार, भुगतान व्यवस्था, तकनीकी ढांचा और महत्वपूर्ण सेवा प्रदाता भी शामिल हैं। उन्होंने जोखिमों की बेहतर निगरानी के लिए ज्यादा विस्तृत और गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिरता का मतलब हर झटके को रोकना नहीं है। असली लक्ष्य ऐसी वित्तीय व्यवस्था तैयार करना है, जो अचानक आने वाले झटकों को सह सके और उनके असर को बड़े संकट में बदलने से रोक सके।

इसलिए RBI Governor की ताजा चेतावनी को मौजूदा वित्तीय संकट की घोषणा के तौर पर नहीं, बल्कि मजबूत व्यवस्था के बावजूद भविष्य के जोखिमों को लेकर सतर्क रहने के संदेश के रूप में देखा जाना चाहिए।

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