Rays of Belief IPO को निवेश करने वाले लोगों की तरफ से जबरदस्त रिएक्शन देखने को मिलाहै। 3 सितंबर 2026 को इसकी बोली बंद होने तक 125 करोड रुपए का यह इश्यू कल 107.71 गुना तक सब्सक्राइब हुआ है। इसमें खास बात यह है कि NII और रिटेल निवेश करने वाले लोग की तरफ से भारी मांग इसमें देखने को मिली है।

Rays of Belief IPO का अंतिम सब्सक्रिप्शन स्टेटस क्या है?
इसके अंतिम दिन तक इस इश्यू को टोटल 107.71 सब्सक्रिप्शन मिला है। इस कैटेगरी के हिसाब से देखा जाए तो NII का हिस्सा 279.11 गुना रिटेल का हिस्सा 195.87 गुना और QIB का हिस्सा 9.06 गुना तक सब्सक्राइब हुआ है। इन आंकड़ों को देखकर पता चलता है कि issue को खास तौर पर नॉन इंस्टीट्यूशन और रिटेल निवेश करने वाले लोग की तरफ से मजबूत मांग मिली है।
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क्या है IPO की कीमत और लॉट साइज
Rays of Belief IPO का प्राइस बैंड 227 रुपए से लेकर 239 रुपए प्रति शेयर पर निर्धारित किया गया था। एक लौट में 62 शेयर रखे गए हैं ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एक लौट के लिए रिटेल निवेशक को 14818 रुपए तक का निवेश करना था। देखा जाए तो इस यीशु का कल आकर 125 करोड रुपए निर्धारित था और यह पूरी तरह से फ्रेश इशू पर था। आईपीओ 1 सितंबर 2026 को खुला हुआ था और 3 सितंबर को बंद हो गया।
इसकी अलॉटमेंट और लिस्टिंग कब होगी?
आईपीओ के शेड्यूल के अनुसार शेरों का अलॉटमेंट 4 सितंबर 2026 से होने की उम्मीद है वही शेयर की लिस्टिंग 8 सितंबर 2026 को बीएसई और NSE पर प्रस्तावित होनी है। अब निवेश करने वाले लोगों की नजर अलॉटमेंट के स्टेटस और लिस्टिंग पर ही टिकी रहेंगी जिन भी निवेश करने वाले लोगों को शेयर अलॉट होने वाले होंगे उनके डिमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट हो जाएंगे।
इसकी कंपनी क्या करती है?
Rays of Belief IPO की कम्पनी मॉम बिलीव ब्रांड के तहत बच्चों के लिए थेरेपी और पर्सनलाइज्ड इंटरवेंशन से जुड़ी सेवाएं देती है। कंपनी न्यूरो डेवलपमेंट कंडीशन से जुड़े बच्चों के लिए अलग-अलग इंटरवेंशन प्रोग्राम पर भी काम करती है। कंपनी ने आईपीओ से पहले एंकर इन्वेस्टर से करी 50 करोड रुपए जुटा लिए थे। आईपीओ के जरिए जुटाए गई रकम का इस्तेमाल कंपनी के बिजनेस जरूरत और निर्धारित किए गए उद्देश्य के लिए होना था।
इसके GMP से क्या संकेत मिल रहा है?
आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी को लेकर भी बाजार में चर्चा देखने को मिल रही है उपलब्ध जानकारी में जीएमपी करीब 20% के आसपास बताई जा रहा था। हालांकि जीएमपी कोई ऑफिशियल एक्सचेंज आंकड़ा नहीं होता है और इसमें बदलाव हमेशा होता रहता है इसलिए जीएमपी को देखकर संभावित लिस्टिंग का सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है। इससे वास्तविक लिस्टिंग के प्राइस और मुनाफे की गारंटी नहीं पता चलतीहै।
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निवेशकों के लिए आखिर क्या मायने रखता है?
107.71 गुना सब्सक्रिप्शन इस शिशु के प्रति मजबूत मांग को दिखाता है हालांकि सिर्फ ज्यादा सब्सक्रिप्शन के आधार पर किसी भी आईपीओ की लिस्टिंग की गारंटी नहीं होतीहै। अब निवेश करने वाले लोगों के लिए सबसे जरूरी तारीख 4 सितंबर के अलॉटमेंट और 8 सितंबर की लिस्टिंग होने वाली है। अलॉटमेंट के बाद निवेश करने वाले लोग अपने आवेदन स्टेटस को देख सकेंगे।




