मन की आँखों से सुर साधते थे रविंद्र जैन

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Birth Anniversary Of Ravindra Jain: मन की आँखों से देखते थे वो, जो हम भी न देख पाएं ऐसे मर्म स्पर्शों को टटोलते थे वो,
भक्ति पदों से घर घर पहुंचे,सबको अपना मानते थे वो। उन्ही के संगीत निर्देशन में अंखियों के झरोखों से फिल्म में रहीमदास के दोहों को हम सबने आसानी से दिल में उतारा था,हम बात कर रहे हैं रविंद्र जैन की ,जिन्होंने अपने मन की आंखों से ,वो दिखाया जो हम अपनी जीती जागती आंखों की रौशनी से भी नही देख पा रहे थे और अपने इन्हीं गुणों को आत्मसात कर के वो एक महान संगीतकार बन गए। उनकी गीत रचनाएं भी प्रेम के अद्भुत संदेश से ओत प्रोत रहीं।

उन्होंने अपने गीत गाने के लिए येसुदास और हेमलता को चुना तो बंगाली और मलयालम सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में कई धार्मिक एल्बमों की रचना की और कई टेलीविजन श्रृंखलाओं के लिए संगीत तैयार किया। टीवी पर उनका बेमिसाल काम रहा – श्री कृष्णा , अलिफ़ लैला , जय गंगा मैया , जय महालक्ष्मी , श्री ब्रह्मा विष्णु महेश , साईं बाबा , जय माँ दुर्गा , जय हनुमान , संकट मोचन हनुमान और महा काव्य महाभारत के लिए।


इन्होंने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत फ़िल्म ‘सौदागर’ से की थी जिसमें इन्होंने गीत भी लिखे थे और उनको स्वरबद्ध भी किया था। भारतीय टेलीविज़न के मीलपत्थर कहे जाने वाले रामानंद सागर द्वारा निर्देशित धारावाहिक रामायण में भी उन्होंने ही संगीत और स्वर दिया,
जिसके ज़रिए वो घर घर की जानी पहचानी आवाज़ बन गए।


रवीन्द्र जैन का जन्म 28 फरवरी 1944 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में कनवरी गंज इलाके में हुआ, उनके पूर्वज राजस्थान के जैसलमेर से यहाँ आए थे। वे सात भाई-बहन थे। वर्ष 1972 में उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी, उनके पिता इन्द्रमणि जैन संस्कृत के बड़े पंडित और आयुर्वेदाचार्य थे माँ थीं किरण देवी ,रवीन्द्र उनकी तीसरी संतान थे। वे बॉलीवुड का सफर शुरू करने से पहले जैन भजन गाते थे। हिन्दी फ़िल्मों में उनके गीत लोकप्रिय हुये है और उनको चाहने वाला बहुत बड़ा वर्ग सामने आया ।आपकी जीवनी सुनहरे पल, ग़ज़ल संग्रह उजालों का सिलसिला और रवींद्र रामायण (रामायण का पद्यानुवाद) भी प्रकाशित हुए।


रवींन्द्र जैन के गीत – संगीत से सजे लोकप्रिय गीतों को अगर हम याद करें तो कुछ गीत हमारे ज़हेन में फौरन दस्तक देते हैं-
गीत गाता चल, ओ साथी गुनगुनाता चल …फिल्म (गीत गाता चल) जब दीप जले आना. … (चितचोर)
ले जाएंगे, ले जाएंगे,दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे … (चोर मचाए शोर) ले तो आए हो हमें सपनों के गांव में. .. (दुल्हन वही जो पिया मन भाए)
ठंडे-ठंडे पानी से नहाना चाहिए … (पति, पत्नी और वो) एक राधा एक मीरा… (राम तेरी गंगा मैली) अंखियों के झरोखों से, मैंने जो देखा सांवरे… (अंखियों के झरोखों से )सजना है मुझे सजना के लिए. .. (सौदागर) हर हसीं चीज का मैं तलबगार हूं. .. (सौदागर) श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम. .. (गीत गाता चल) कौन दिशा में लेके … फिल्म- (नदिया के पार) सुन सायबा सुन, प्यार की धुन. … (राम तेरी गंगा मैली) मुझे हक है. .. फिल्म (विवाह) से और इस फेहरिस्त में (हिना) फिल्म के सारे गाने हम कैसे भूल सकते हैं जो यक़ीनन आपके फेवरेट गानों में शामिल होंगे।


और इन सबसे अलग एक रचना थी ,’अयोध्या करती है आह्वान’कला के क्षेत्र में रविंद्र जैन के योगदान के लिए उन्हें 2015 में भारत गणराज्य के चौथे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। 1985 में राम तेरी गंगा मैली में उनके काम के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
9 अक्टूबर, 2015 उनका निधन हो गया कुछ और दिलनशीं नग़्मों और धुनों को तलाशते हुए वो हमसे दूर चले गए पर वो अपने गीतों के ज़रिए हमारे दिलों में हमेशा रहेंगे। वीन्द्र जैन को भारतीय सिनेमा जगत में कुछ सबसे खूबसूरत, कर्णप्रिय और भावपूर्ण गीतों के लिए हमेशा जाना जाता रहेगा।

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