Site icon SHABD SANCHI

Ramleela Maidan Rally : किसी ने कहा ‘हल्दीघाटी’ तो कोई बोला ‘नाचने वाला बंदर’! रामलीला मैदान में किसने क्या कहा?

Ramleela Maidan Rally

Ramleela Maidan Rally : दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को ऐसी सियासी रामलीला हुई… कि जिसका शोर दिल्ली से यूपी तक गूंज रहा है। इस सियासी रामलीला में सियासत का ऐसा मंच सजा कि हर नेता अपने-अपने रंग में डूबा नजर आया… कोई लोकतंत्र को बचाने के लिए बोला तो कोई वोट चोरी का हिसाब मांग रहा था। कोई चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा कर रहा था तो कोई प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से हटाने की हुंकार भर रहा था। विपक्षी INDIA गठबंधन के तमाम बड़े नेता एक मंच पर जुटे और दावा 10 लाख लोगों को जुटाने का था। लेकिन रैली खत्म होते-होते मुद्दा वोट चोरी से निकलकर भीड़ की चोरी तक पहुंच गया।

एक तरफ विपक्ष सत्ता धारियों पर हमले पे हमला कर रहे थे तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष भी एक एक विपक्षी नेता के बयान पर पलटवार कर रहे थे। बागपत से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने तो राहुल गांधी को नाचने वाला बंदर तक कह डाला। बीजेपी ने कांग्रेस की महारैली को फ्लॉप शो कहा।

संजय राउत ने बीजेपी को आंखें दान करने की पेशकश कर दी। और बृजभूषण शरण सिंह ने राहुल गांधी के लिए ऐसी उपमा दे दी कि सियासी गलियारों में नई बहस छिड़ गई। यानी मुद्दा भले ही चुनाव आयोग और लोकतंत्र का था, लेकिन सुर्खियां नेताओं के बयानों ने बटोर लीं।

अखिलेश यादव बोले- हल्दीघाटी है रामलीला मैदान

अखिलेश यादव ने रामलीला मैदान को लोकतंत्र की हल्दीघाटी बता दिया। अब हल्दीघाटी का नाम आते ही महाराणा प्रताप और अकबर की लड़ाई याद आती है। लेकिन अखिलेश के इस बयान में निशाने पर बीजेपी थी। उनका कहना था कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में बदलाव की शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी। अब अखिलेश ने रामलीला मैदान को हल्दीघाटी तो बता दिया, लेकिन बीजेपी ने इस लड़ाई में भीड़ का हिसाब-किताब निकालना शुरू कर दिया।

किरने रिजिजू बोले- कांग्रेस ने AI से बनाई भीड़

दरअसल, INDIA गठबंधन की तरफ से रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने का दावा किया गया था। लेकिन बीजेपी ने दावा किया कि मैदान में उतनी भीड़ नहीं जुटी, जितनी विपक्ष उम्मीद कर रहा था। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने भी मैदान के खाली हिस्सों और खाली कुर्सियों का हवाला देकर रैली को फ्लॉप बताया और फिर एंट्री हुई केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की। उन्होंने कांग्रेस नेताओं की तरफ से साझा की गई एक तस्वीर पर AI का आरोप लगाते हुए ऐसा तंज कसा कि अब रैली में असली भीड़ से ज्यादा चर्चा AI वाली भीड़ की होने लगी। रिजिजू ने कहा कि रामलीला मैदान को खचाखच भरा दिखाने के लिए कांग्रेस की फेक नैरेटिव टीम AI से बनी तस्वीर भी ठीक से नहीं बना पाई।

अब राजनीति में तस्वीरें भी दो तरह की हो गई हैं। एक वो जो कैमरे में कैद होती हैं और दूसरी वो, जिन पर AI का ठप्पा लग जाता है। लेकिन सवाल ये है कि मैदान में कितने लोग थे, इसका जवाब तस्वीरों से नहीं, आंकड़ों से मिलना चाहिए। किरने रिजिजू के इस तंज के बाद शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भी पलटवार कर दिया। उन्होंने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी पार्टी एक मुहिम शुरू करेगी और बीजेपी को मिलकर नेत्रदान करेगी। क्योंकि दिल्ली में इतनी बड़ी रैली हुई, लेकिन बीजेपी को दिखाई ही नहीं दी।

AI तस्वीर पर संजय राउत ने भाजपा को घेरा

एक तरफ बीजेपी को कांग्रेस की तस्वीर में AI नजर आया तो दूसरी तरफ संजय राउत को बीजेपी की आंखों में कमी नजर आ गई। अब सियासत में किसकी नजर कमजोर है, इसका फैसला जनता करेगी। लेकिन रैली की चर्चा सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही। उत्तर प्रदेश के बागपत में भी राहुल गांधी का नाम लेकर ऐसा बयान दिया गया कि सियासी गलियारों में इसकी गूंज सुनाई देने लगी।

बीजेपी के नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने क्षत्रिय स्वाभिमान महासम्मेलन में राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी को 55 साल का युवा बताते हुए कहा कि उनमें अब तक समझदारी नहीं आई। कभी एक डाल पर जाते हैं, तो कभी दूसरी डाल पर। इसी दौरान उन्होंने राहुल गांधी के लिए ‘नाचने वाला बंदर’ जैसी टिप्पणी कर दी।

बृजभूषण शरण सिंह ने राहुल गांधी को कहा नाचने वाला बंदर

अब बृजभूषण शरण सिंह के इस बयान को सुनकर यही लगता है कि दिल्ली में विपक्ष लोकतंत्र की लड़ाई लड़ रहा था और बागपत में उसकी राजनीतिक व्याख्या जंगल की डालियों तक पहुंच गई।
इसी बीच दिल्ली में एक और दिलचस्प मार्च निकल रहा था। INDIA गठबंधन की रैली रामलीला मैदान में थी और लाल हिट जनता पार्टी राजघाट से रामलीला मैदान की तरफ मार्च कर रही थी।

इस मार्च का नारा था- ‘मोदी जी कहीं नहीं जा रहे ब्रो!’ पार्टी की तरफ से जारी जानकारी के मुताबिक करीब 200 लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। यानी एक तरफ विपक्ष मोदी सरकार को हटाने का राजनीतिक संदेश दे रहा था तो दूसरी तरफ इस पार्टी ने पहले ही ऐलान कर दिया कि मोदी जी कहीं नहीं जाने वाले।

मोदी जी जाना भी चाहें, हम जाने नहीं देंगे – राहुल गांधी

इस नारे के बीच राहुल गांधी ने भी साफ कर दिया कि मोदी जी कहीं नहीं जाएंगे, वो जाना भी चाहें तो हम उन्हें कहीं जाने भी नहीं देंगे। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और जेल भेजने की भी बात कही। राहुल गांधी ने कहा कि वोट चोरी करने वाले ज्ञानेश कुमार तो जेल जाएंगे ही। उन्हें जेल हम भेज कर रहेंगे। इसके बाद मोदी जी और अमित शाह का नंबर है। हम जल्द ही मोदी जी और अमित शाह के खिलाफ लीगल एक्शन लेंगे और जो देश में अबतक किया उसका जवाब लेंगे।

राहुल गांधी ने एक ही मंच से पहले ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा ऐलान किया। फिर मोदी और अमित शाह को भी अपनी अगली राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का संदेश दे दिया। हालांकि, ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप और भविष्य में कार्रवाई को लेकर उनका दावा है, कोई न्यायिक फैसला नहीं,

लेकिन राहुल गांधी के इस ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कहां चुप रहने वाले थे। योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के चौरी-चौरा में आयोजित कार्यक्रम से विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह माहौल प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नहीं, बल्कि गरीबों के खिलाफ है। सीएम योगी ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को किसानों, महिलाओं और युवाओं के हितों के खिलाफ बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष सरकार के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।

ये माहौल पीएम मोदी के खिलाफ नहीं गरीबों के खिलाफ है- सीएम योगी

दिल्ली में विपक्ष कह रहा है कि लोकतंत्र खतरे में हैं। राहुल गांधी कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे। अखिलेश यादव रामलीला मैदान को हल्दीघाटी बता रहे हैं। संजय राउत ने नेत्रदान की मुहिम छेड़ दी और बृजभूषण शरण सिंह ने बंदर वाली टिप्पणी कर दी।
उधर, बीजेपी कह रही है कि ‘रैली फ्लॉप’ रही तो लाल हिट जनता पार्टी कह रही है कि ‘मोदी जी कहीं नहीं जा रहे ब्रो’। अब इस पूरी सियासी बयानबाजी में एक बात तो साफ है, रामलीला मैदान में मुद्दा भले ही वोट चोरी और लोकतंत्र को बचाने का था, लेकिन नेताओं के बयानों ने सियासत का पूरा मनोरंजन पैकेज तैयार कर दिया।

रामलीला मैदान की सियासत पहुंचेगी उत्तर प्रदेश

दिल्ली की इस सियासी लड़ाई का अगला बड़ा मैदान उत्तर प्रदेश बनने जा रहा है। क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है। ऐसे में सवाल सिर्फ इतना नहीं कि रामलीला मैदान में कितनी भीड़ जुटी।

सवाल ये भी है कि इस रैली से INDIA गठबंधन की एकजुटता कितनी मजबूत हुई? क्या विपक्ष वोट चोरी के मुद्दे को यूपी की जनता के बीच बड़ा चुनावी मुद्दा बना पाएगा? क्या बीजेपी इन आरोपों का जवाब देकर अपनी राजनीतिक जमीन बचा पाएगी? फिलहाल दिल्ली की रैली खत्म हो चुकी है। लेकिन बयानों की रामलीला अभी जारी है।

यह भी पढ़े : Amit Shah Rewind Ayodhya Firing : ‘रामभक्तों पर चली गोली का हिसाब दो’, 2027 से पहले अमित शाह ने अखिलेश को याद दिलाया अयोध्या गोलीकांड

Exit mobile version