प्रयागराज माघ मेले (Prayagraj Magh Mela Controversy) में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand) के शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हो गई। अफसरों से भी झड़प हुई। इसके बाद पुलिस ने शिष्यों को दौड़ाकर पकड़ लिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। एक साधु को पुलिस ने चौकी में बहुत पीटा
इसके बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद नाराज हो गए और शिष्यों को पुलिस की कस्टडी से छुड़वाने पर अड़ गए। उन्हें अफसरों ने समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। करीब 2 घंटे तक हंगामा चलता रहा। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के सभी समर्थकों को हिरासत में ले लिया।
बाद में शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। दरअसल पुलिस ने भीड़ को देखते हुए शंकराचार्य को रथ से उतरकर पैदल जाने को कहा था, लेकिन शिष्य नहीं माने और आगे बढ़ने लगे। इस पर बहस हुई, फिर देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
शंकरायाचार्य ने कहा- बड़े-बड़े अधिकारी हमारे संतों को मार रहे थे। पहले तो हम लौट रहे थे, लेकिन अब स्नान करेंगे और कहीं नहीं जाएंगे। वे हमें रोक नहीं पाएंगे। इनको ऊपर से आदेश होगा कि इन्हें परेशान करो। यह सरकार के इशारे पर हो रहा है, क्योंकि वे हमसे नाराज हैं। जब महाकुंभ में भगदड़ मची थी, तो मैंने उन्हें जिम्मेदार ठहराया था। अब वे बदला निकालने के लिए अधिकारियों से कह रहे होंगे।
