PNGRB वाहन ईंधन अध्ययन: ट्रांसपोर्ट संक्रमण पर नई पहल

Smog-covered road traffic highlighting vehicle emissions amid transport fuel transition in India

PNGRB वाहन ईंधन अध्ययन की शुरुआत भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में उत्सर्जन घटाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस अध्ययन के तहत अलग-अलग वाहन ईंधनों की तुलना की जाएगी, ताकि केंद्र और राज्य सरकारें ऊर्जा संक्रमण से जुड़े फैसले ठोस आंकड़ों के आधार पर ले सकें।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर केंद्रित नई पहल

भारत में शहरी वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन एक बड़ी नीति चुनौती बन चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में Petroleum and Natural Gas Regulatory Board (PNGRB) ने एक व्यापक अध्ययन शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य यह समझना है कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर में कौन-से वाहन ईंधन व्यावहारिक और पर्यावरणीय दृष्टि से संतुलित हैं।

PNGRB के अनुसार, ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले ईंधन न केवल उत्सर्जन बल्कि लागत, आपूर्ति और बुनियादी ढांचे को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए नीति निर्धारण से पहले तुलनात्मक आकलन जरूरी है।

PNGRB वाहन ईंधन अध्ययन का उद्देश्य

इस अध्ययन का मुख्य फोकस विभिन्न तकनीकी विकल्पों की बहुआयामी तुलना करना है। इसमें CNG, LNG, इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन जैसे ईंधनों को शामिल किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि संक्रमण काल में किन विकल्पों को प्राथमिकता दी जाए।

PNGRB के चेयरपर्सन Anil Kumar Jain के अनुसार, नीति निर्माताओं को अक्सर अलग-अलग तकनीकों के बीच चुनाव करना पड़ता है। ऐसे में तथ्य आधारित अध्ययन निर्णय प्रक्रिया को सरल बना सकता है।\

Vehicle Emissions and Transport Fuel Transition Study by PNGRB

किन संस्थाओं की भागीदारी

यह अध्ययन PNGRB के मार्गदर्शन में एक संयुक्त प्रयास के रूप में किया जा रहा है। इसमें कई सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां शामिल हैं, जिनमें IGL, MGL, GAIL Gas, Gujarat Gas, Assam Gas और Green Gas प्रमुख हैं। इसके अलावा, City Gas Distribution कंपनियों के संगठन ACE की भी भागीदारी है।

अध्ययन का कार्य The Energy and Resources Institute (TERI) को सौंपा गया है। TERI एक स्वतंत्र और गैर-लाभकारी शोध संस्था है, जो ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर काम करती है।

CNG और LNG की भूमिका पर जोर

PNGRB का मानना है कि ट्रांसपोर्ट संक्रमण में केवल एक तकनीक पर निर्भर रहना व्यावहारिक नहीं होगा। चेयरपर्सन अनिल कुमार जैन के मुताबिक, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन विकल्पों के साथ-साथ CNG और LNG की भी अहम भूमिका बनी रहेगी।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत की बिजली आपूर्ति अभी बड़े पैमाने पर कोयले पर आधारित है। ऐसे में बिना संदर्भ के पूर्ण इलेक्ट्रिफिकेशन के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर भी विचार जरूरी है।

भारत के जलवायु लक्ष्य और चुनौती

भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर इस लक्ष्य की राह में सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में ट्रांसपोर्ट का हिस्सा लगभग 10 प्रतिशत है।

इसमें सड़क परिवहन की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। सरकार ने 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य भी तय किया है, जिससे संक्रमण काल में उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा सके।

प्रदूषण और स्वास्थ्य से जुड़ा पहलू

TERI की डायरेक्टर जनरल Vibha Dhawan ने ट्रांसपोर्ट संक्रमण को वायु प्रदूषण और जलवायु जोखिम से जोड़ा। उनके अनुसार, आज लिए गए फैसले आने वाले दशकों तक उत्सर्जन की दिशा तय करेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि बड़े भारतीय शहरों में PM2.5 प्रदूषण का बड़ा हिस्सा वाहनों से आता है। इससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है और आर्थिक नुकसान भी बढ़ता है।

नीति निर्धारण के लिए संभावित असर

PNGRB वाहन ईंधन अध्ययन से मिलने वाले निष्कर्ष केंद्र और राज्य सरकारों के लिए नीति निर्माण में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इससे उद्योग जगत को भी निवेश और बुनियादी ढांचे से जुड़े फैसलों में स्पष्टता मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के तुलनात्मक अध्ययन ट्रांसपोर्ट सेक्टर में संतुलित और व्यावहारिक संक्रमण का रास्ता दिखा सकते हैं।

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