पिया बावरी का चैन

ansu (1)

Hindi Story :जाने क्यों मुझे उसके पहलू में सुकून मिलता और वो है कि बस मुझसे दूर जाने के बहाने ढूँढते ,जाने क्यों ! मैंने उनसे पूछा भी कि क्या शादी के बाद उन्हें मुझसे प्यार नहीं हुआ तो वो कहते – अरे प्यार न होता तो तुम्हारे साथ क्यों होता और बात टाल जाते पर उनके जवाब से मुझे एक खलिश सी महसूस होती ये सिलसिला चलते – चलते आज यहाँ तक पहुँच गया कि मै अब उनके पास नहीं जाती और वो खुद तो मेरे पास आते नहीं थे तो अब क्यों आते और हम देखते ही देखते एक छत के नीचे होते हुए भी अजनबी से हो गए।

पर मुझे इस बात की तसल्ली थी कि वो अब खुश थे ,अब उन्हें कोई बहाना नहीं बनाना पड़ता है मुझसे दूर जाने का क्योंकि अब वो मुझसे दूर ही है पर शायद उसके पास हैं जिसके पास वो जाना चाहते थे पर मैंने उन्हें ज़बरदस्ती बांध के रखा था और वो महसूस कराने की कोशिश कर रही थी जो मै उनके साथ में महसूस करती थी।

ख़ैर हमारा रिश्ता जो भी है जैसे भी है मुझे तो बस उनकी खिदमत करने में भी वही लुत्फ़ आ रहा है जैसे कभी उनके पहलू में आता था और ये ख़ुशी है कि वो जो चाहते थे मैंने उन्हें दे दिया पर मेरे घरवाले मुझसे खुश नहीं हैं सब कहते हैं बावरी हो गई है अपने सुख में जानबूझ कर आग लगा दी है ,चाहती तो पति को अपने प्रेम और सुंदरता की डोर से बांध लेती मगर इसने तो आज़ाद छोड़ दिया।

इस तरह बरसों- बरस बीत गए मै अकेली थी पर मुझे अकेले होने का एहसास इस तरह न हुआ कि दुख होने लगे, कभी होने भी लगता तो उन्हें एक नज़र देख लेती और आँसू रुक जाते पर अब आँसुओं को नहीं रोक पा रहीं हूँ क्योंकि पंद्रह दिन होने के आए वो घर नहीं आए थे हालाँकि लोगों ने मुझे उनका ठिकाना बताया था पर मैंने कभी वहाँ जाने की हिम्मत नहीं की ,पर आज दिल बैठा जा रहा था ये सोचकर कि कहीं उनको कुछ हो तो नहीं गया ,मेरी नज़रें दरवाज़े पर लगी थीं कि अचानक गेट पर गाड़ी रुकी और ड्राइवर ने उन्हें सहारा देकर गाड़ी से उतारा ये देखकर मेरे होश उड़ गए मै दौड़कर गेट पर पहुँची।

मैंने ड्राइवर से पूछा क्या हुआ तो उसने बताया सर की तबियत नहीं अच्छी है और अंदर तक पहुँचा दिया फिर जाने लगा पर मुझे चैन न आया तो मै उसके पीछे -पीछे बाहर आ गई , उससे पूछा आखिर क्या हुआ है कि इन्हें मेरे पास आना पड़ गया तो वो बोला कि सर को कैंसर हो गया है डॉक्टर ने कहा है बहोत कम वक़्त है उनके पास और मैम के पास इतना टाइम नहीं कि वो इनकी देखभाल कर सके इसलिए उन्होंने कहा मै इन्हें आपके पास छोड़ आऊँ।

अब मेरे पास कुछ नहीं था बोलने के लिए ,कहने के लिए क्योंकि आज मेरे दिल की बरसों पुरानी मुराद पूरी हो गई थी , मेरे पिया, मेरे सामने थे पर ये आरज़ू इस तरह पूरी होगी ये मैंने सपने में भी नहीं सोचा था और मै बस अपने को ये समझाते हुए कि वो ठीक हो जाएँगें ,जी-जान से लग गई उसकी देख रेख में और इस दौरान वो मुझे बस देखते रहते।

एक दिन उनकी हालत ज़रा ज़्यादा खराब लग रही थी, मैंने कहा मैं डॉक्टर को घर पर ही बुला लेती हूँ तो कहने लगे नहीं मत बुलाओ बस मेरे पास बैठ जाओ ये सुनकर मेरे पैरों तले से ज़मीन खिसक गई मुझे लगा एक पल के लिए आज मै अपनी न रही बल्कि उसकी हो गई हूँ जिसकी सदा होना चाहती थी और उसके पहलू में चली गई, आज दिल सुकून में था और आँसू बह रहे थे ,उनको भी शायद मुझे गले से लगा के कुछ ऐसा ही एहसास हो रहा था इसलिए उनके आँसू मेरे गालों पर बहते मेरे आँसुओं से मिल गए थे और कुछ ही पल में हम चैन की नींद सो गए फिर कभी न उठने के लिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *